हरादून: उत्तराखंड को नशा मुक्त बनाने के संकल्प के साथ मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में NCORD की 10वीं महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। सरकार ने अब ‘रिजल्ट ओरिएंटेड’ मोड में काम करने का निर्णय लिया है, जिसके तहत अगले दो महीनों के भीतर NDPS एक्ट से जुड़े सभी पुराने मामलों के निस्तारण का लक्ष्य रखा गया है.

बैठक के मुख्य निर्णय और रणनीतियाँ:
  • लंबित मामलों का त्वरित निस्तारण: प्रदेश में वर्तमान में NDPS के 546 मामले लंबित हैं। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए हैं कि अगले 2 माह में इन सभी का निस्तारण सुनिश्चित किया जाए ताकि अपराधियों में कानून का भय बना रहे.
  • अस्पतालों में विशेष बेड आरक्षित: नशा मुक्ति और पुनर्वास को प्राथमिकता देते हुए सभी जिला अस्पतालों में 5 से 10 बेड अनिवार्य रूप से नशा मुक्ति (De-addiction) के लिए आरक्षित रखने के आदेश दिए गए हैं.
  • कोविड इंफ्रास्ट्रक्चर का पुन: उपयोग: सरकार ने निर्णय लिया है कि कोविड काल के दौरान तैयार किए गए अतिरिक्त बेड और मेडिकल सुविधाओं का उपयोग अब नशा मुक्ति केंद्रों के विस्तार के लिए किया जाएगा.
  • हॉटस्पॉट्स पर 24 घंटे निगरानी: नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए चिन्हित हॉटस्पॉट्स पर पुलिस और STF चौबीसों घंटे निगरानी रखेगी। साथ ही, फील्ड में पुलिस द्वारा ड्रग डिटेक्शन किट का व्यापक स्तर पर उपयोग किया जाएगा.
  • कोटद्वार में नया केंद्र: पौड़ी जिला मजिस्ट्रेट (DM) को निर्देशित किया गया है कि वे कोटद्वार में नशा मुक्ति केंद्र के लिए जल्द से जल्द भवन चिन्हित कर उसे क्रियाशील बनाएं.
  • आउटकम-बेस्ड जागरूकता: शिक्षण संस्थानों में केवल औपचारिकता के लिए ‘एंटी ड्रग क्लब’ नहीं चलेंगे। अब गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) के साथ मिलकर ऐसे जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे जिनका वास्तविक प्रभाव (Outcome) जमीन पर दिखे.
नशे के खिलाफ सख्त रुख
मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने स्पष्ट किया कि नशे के सौदागरों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जाएगी। इस बैठक में पुलिस, स्वास्थ्य, शिक्षा और समाज कल्याण विभाग के उच्च अधिकारियों ने हिस्सा लिया और ड्रग तस्करी की कड़ियों को तोड़ने के लिए आपसी समन्वय मजबूत करने पर सहमति जताई।

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