देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घोषणा की है कि देवभूमि केवल आस्था और आध्यात्म की ही नहीं, बल्कि प्राचीन ज्ञान, विज्ञान और संस्कृति के वैश्विक केंद्र के रूप में भी उभरेगी। कल सचिवालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में सीएम धामी ने हरिद्वार स्थित ऋषिकुल के मदन मोहन मालवीय प्राच्य शोध संस्थान को विश्वस्तरीय स्वरूप देने के लिए मास्टर प्लान की समीक्षा की।
मुख्य घोषणाएँ और विजन:
  • वैश्विक शोध केंद्र: मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि ऋषिकुल संस्थान को भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शोध के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित किया जाए
  • कुंभ मेला 2027 का लक्ष्य: उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संस्थान के विस्तार और आधुनिकीकरण का कार्य महाकुंभ शुरू होने से पहले हर हाल में पूरा कर लिया जाना चाहिए।
  • पाँच मुख्य अध्ययन केंद्र: इस संस्थान के भीतर पाँच प्रमुख विभाग स्थापित किए जाएंगे, जिनमें श्रुति केंद्र (वेद), दर्शन केंद्र (भारतीय चेतना), आयु केंद्र (आयुर्वेद), विज्ञान केंद्र (पारंपरिक वैज्ञानिक विरासत) और कला केंद्र शामिल होंगे।
  • प्राचीन और आधुनिक का संगम: बैठक में तय किया गया कि यहाँ वैदिक गणित, वेदों में निहित विज्ञान, खगोल विज्ञान, धातु विज्ञान और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर गहन शोध होगा। 
विकास और विरासत का संतुलन:
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड हमेशा से ऋषियों और वैज्ञानिक चिंतन की पावन भूमि रही है। राज्य सरकार की प्राथमिकता आर्यभट्ट, ब्रह्मगुप्त और वराहमिहिर जैसे प्राचीन विद्वानों के योगदान को नई पीढ़ी से जोड़ना है। इसके लिए संस्थान में डिजिटल पांडुलिपि संरक्षण केंद्र, ई-लर्निंग सुविधाएँ और आधुनिक शोध प्रयोगशालाएँ भी विकसित की जाएंगी। 
सचिवालय की बैठक के अन्य महत्वपूर्ण बिंदु:
इस समीक्षा बैठक में पर्यटन विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है। सीएम ने स्पष्ट किया कि यह संस्थान केवल शिक्षा का ही नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण और संस्कारों का भी केंद्र बनेगा। इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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