कल (17 अप्रैल, 2026) भारतीय राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ आया जब 131वां संविधान संशोधन विधेयक, जिसे ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को जल्द लागू करने के लिए लाया गया था, लोकसभा में गिर गया। सरकार सदन में जरूरी दो-तिहाई बहुमत जुटाने में विफल रही, जिससे 2029 के आम चुनावों में महिला आरक्षण लागू होने की संभावनाओं को बड़ा झटका लगा है।
खबर का विस्तृत विवरण:
  • वोटिंग के नतीजे: बिल को पारित करने के लिए सदन में उपस्थित सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत (कम से कम 352 वोट) की आवश्यकता थी। वोटिंग के दौरान कुल 528 सांसदों में से 298 ने पक्ष में और 230 ने विरोध में मतदान किया। बहुमत के आंकड़े से 54 वोट कम रह जाने के कारण स्पीकर ओम बिरला ने बिल को खारिज घोषित कर दिया।
  • बिल का मुख्य उद्देश्य: इस नए विधेयक (131वां संशोधन) के जरिए सरकार 2023 के मूल महिला आरक्षण कानून को जनगणना और परिसीमन (Delimitation) की लंबी शर्तों से अलग करना चाहती थी। सरकार का प्रस्ताव था कि 2011 की जनगणना के आधार पर तुरंत परिसीमन कर लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 कर दी जाए, ताकि 2029 में महिलाओं को 33% आरक्षण मिल सके।
  • विपक्ष का विरोध: विपक्षी दलों, जिनमें कांग्रेस, सपा और डीएमके शामिल थे, ने परिसीमन के इस नए तरीके का कड़ा विरोध किया। उनका तर्क था कि 2011 की जनगणना के आधार पर सीटें बढ़ाने से दक्षिण भारतीय राज्यों का प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा。 राहुल गांधी ने इसे “राष्ट्र-विरोधी” और अखिलेश यादव ने इसे “महिलाओं के हक का हरण” करने वाला कदम बताया।
  • सरकार की प्रतिक्रिया: बिल गिरने के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने दुख जताया और कहा कि विपक्ष ने महिलाओं को आरक्षण देने का एक सुनहरा अवसर खो दिया है। इसके साथ ही, सरकार ने इससे जुड़े अन्य दो बिल—परिसीमन विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन बिल—भी वापस ले लिए हैं।
परिणाम और भविष्य:
अब जब यह संशोधन बिल गिर गया है, तो महिला आरक्षण का कार्यान्वयन फिर से पुरानी शर्तों (नई जनगणना और उसके बाद परिसीमन) पर टिक गया है। जानकारों का मानना है कि इस देरी के कारण अब महिलाओं को संसद में आरक्षण के लिए 2034 तक का इंतजार करना पड़ सकता है।
विवरण आंकड़े/स्थिति
बिल का नाम 131वां संविधान संशोधन विधेयक, 2026
पक्ष में वोट 298
विरोध में वोट 230
नतीजा खारिज (दो-तिहाई बहुमत नहीं मिला)

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