उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। मंगलवार को उत्तराखंड विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने एक ऐतिहासिक घोषणा की। उन्होंने बताया कि अब राज्य के सभी राजकीय और अशासकीय महाविद्यालयों के साथ-साथ विश्वविद्यालयों में होने वाले छात्र संघ चुनावों में छात्राओं को 50 प्रतिशत प्रतिनिधित्व दिया जाएगा।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम की तर्ज पर निर्णय
शिक्षा मंत्री ने सदन में जानकारी दी कि जिस प्रकार केंद्र सरकार ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के माध्यम से राजनीति में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की है, उसी संकल्प को आगे बढ़ाते हुए उत्तराखंड सरकार ने छात्र राजनीति में भी आधी आबादी को उनका हक देने का निर्णय लिया है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, मंत्री ने कहा कि यदि महिलाओं को अवसर दिया जाए, तो वे नेतृत्व क्षमता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करती हैं।
मेधावी छात्रों के लिए भी विशेष प्रावधान
छात्र संघ चुनावों में केवल आरक्षण ही नहीं, बल्कि शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ाने के लिए भी नए निर्देश जारी किए गए हैं।
  • मेधावी भागीदारी: मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने स्पष्ट किया कि छात्र संघ में मेधावी छात्र-छात्राओं की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी।
  • संविधान में संशोधन: इस नई व्यवस्था को लागू करने के लिए सभी राजकीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को ‘छात्र संघ संविधान’ में आवश्यक संशोधन करने के निर्देश दे दिए गए हैं।
  • उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य छात्र राजनीति को केवल शक्ति प्रदर्शन तक सीमित न रखकर इसे बौद्धिक और समावेशी बनाना है।
विशेष सत्र का मुख्य एजेंडा
यह घोषणा विधानसभा के उस विशेष सत्र के दौरान हुई जो मुख्य रूप से महिला आरक्षण विधेयक और ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर चर्चा के लिए बुलाया गया था। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी सरकार मातृशक्ति के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है।
छात्र संगठनों की प्रतिक्रिया
इस फैसले का विभिन्न छात्र संगठनों ने स्वागत किया है, हालांकि कुछ संगठनों का मानना है कि इसके क्रियान्वयन की नियमावली को जल्द स्पष्ट किया जाना चाहिए। इससे पहले भी जुलाई 2024 में सरकार ने इस दिशा में विचार करने के संकेत दिए थे, लेकिन अब विधानसभा के पटल पर इसकी औपचारिक घोषणा होने से इसे कानूनी अमलीजामा पहनाया जाना तय हो गया है।
निष्कर्ष
शिक्षा मंत्री की इस घोषणा से उत्तराखंड देश का ऐसा पहला राज्य बनने की ओर अग्रसर है, जहां छात्र राजनीति के बुनियादी स्तर पर महिलाओं को 50% आरक्षण मिलेगा। यह कदम न केवल महिला नेतृत्व को उभारेगा, बल्कि भविष्य की राजनीति के लिए एक नई पौध भी तैयार करेगा। सत्र के दौरान विपक्षी दलों ने भी महिला अधिकारों के मुद्दे पर अपने विचार रखे, जिससे सदन का माहौल पूरी तरह नारी शक्ति के सम्मान पर केंद्रित रहा।

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