ऋषिकेश और हरिद्वार के बीच हाल ही में मनसा देवी फाटक पर एक हादसा हुआ था, जहाँ एक अनियंत्रित वाहन (ट्रक/लोडर) ने रेलवे फाटक को टक्कर मारकर उसे पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया था।
ऋषिकेश, उत्तराखंड: ऋषिकेश में मनसा देवी रेलवे फाटक पर एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहाँ रेल आने के वक्त बंद किए जा रहे रेलवे बैरियर को एक तेज रफ्तार लोडर (ट्रक) ने जोरदार टक्कर मार दी। इस टक्कर की वजह से रेलवे फाटक का बैरियर टूटकर पटरियों के पास गिर गया, जिससे रेलवे कर्मचारियों और यात्रियों के बीच अफरा-तफरी मच गई।
घटना का विवरण:
- समय और स्थान: यह हादसा मनसा देवी रेलवे क्रॉसिंग पर तब हुआ जब गेटमैन ट्रेन के आने की सूचना पर बैरियर नीचे कर रहा था। उसी समय जल्दबाजी में क्रॉसिंग पार करने के चक्कर में एक लोडर चालक ने बैरियर में टक्कर मार दी।
- बाल-बाल बची ट्रेन: गनीमत रही कि गेटमैन ने तुरंत मुस्तैदी दिखाई और क्षतिग्रस्त बैरियर के बावजूद अन्य वाहनों को रोककर सिग्नल को सुरक्षित रखा। अगर ट्रेन उस वक्त और करीब होती, तो कोई बड़ा हादसा हो सकता था।
- यातायात पर असर: इस घटना के बाद कुछ समय के लिए मार्ग पर वाहनों का जाम लग गया। रेलवे पुलिस के जवानों ने मौके पर पहुँचकर यातायात को सुचारू कराया और हाथ से सुरक्षा घेरा बनाकर ट्रेन को सुरक्षित पास कराया।
प्रशासन की कार्रवाई:
राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) और आरपीएफ (RPF) ने तत्काल कार्रवाई करते हुए लोडर को अपने कब्जे में ले लिया है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार:
राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) और आरपीएफ (RPF) ने तत्काल कार्रवाई करते हुए लोडर को अपने कब्जे में ले लिया है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार:
- आरोपी चालक के खिलाफ रेलवे अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
- क्षतिग्रस्त फाटक की मरम्मत के लिए तकनीकी टीम को लगाया गया है।
- रेलवे गेटमैन की सतर्कता की सराहना की गई है क्योंकि उन्होंने समय रहते स्थिति को नियंत्रित किया।
रेलवे की अपील:
रेलवे विभाग ने यात्रियों और वाहन चालकों से अपील की है कि रेलवे क्रॉसिंग पर जल्दबाजी न करें। सिग्नल होते ही या बैरियर गिरते समय वाहन को रोकना अनिवार्य है, अन्यथा यह न केवल रेलवे संपत्ति को नुकसान पहुँचाता है बल्कि सैकड़ों यात्रियों की जान जोखिम में डाल सकता है।
रेलवे विभाग ने यात्रियों और वाहन चालकों से अपील की है कि रेलवे क्रॉसिंग पर जल्दबाजी न करें। सिग्नल होते ही या बैरियर गिरते समय वाहन को रोकना अनिवार्य है, अन्यथा यह न केवल रेलवे संपत्ति को नुकसान पहुँचाता है बल्कि सैकड़ों यात्रियों की जान जोखिम में डाल सकता है।