देहरादून, 11 मई 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऊर्जा संरक्षण और ईंधन बचाने के आह्वान पर अमल करने निकले उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी खुद एक विवाद में फंस गए हैं। सोमवार को मंत्री जी देहरादून की सड़कों पर सरकारी तामझाम छोड़कर स्कूटी से कैंप कार्यालय पहुंचे थे, लेकिन जिस स्कूटी (UK07 DX 4978) का उन्होंने उपयोग किया, उसका इंश्योरेंस मार्च 2026 में ही खत्म हो चुका था। जैसे ही यह जानकारी सार्वजनिक हुई, सोशल मीडिया पर मंत्री जी को ट्रैफिक नियमों की धज्जियां उड़ाने के लिए जमकर ट्रोल किया जाने लगा।
सादगी का संदेश पड़ा भारी
 रिपोर्ट के अनुसार, मंत्री गणेश जोशी गढ़ी कैंट में एक कार्यक्रम के बाद अपनी सरकारी इनोवा छोड़कर एक्टिवा स्कूटी से रवाना हुए। उनका उद्देश्य जनता को संदेश देना था कि छोटी दूरी के लिए भारी वाहनों के बजाय दुपहिया का प्रयोग करें। हालांकि, उनकी इस ‘सादगी यात्रा’ का वीडियो वायरल होते ही जागरूक नागरिकों ने एम-परिवहन (mParivahan) ऐप पर वाहन का विवरण चेक कर लिया, जिसमें वाहन का बीमा और प्रदूषण प्रमाण पत्र (PUC) दोनों ही एक्सपायर मिले। 
विवाद के मुख्य बिंदु:
  • एक्सपायर्ड दस्तावेज: स्कूटी का इंश्योरेंस 27 मार्च 2026 को समाप्त हो गया था, जबकि मंत्री इसे मई में चला रहे थे।
  • पुराना चालान: जांच में पता चला कि इसी स्कूटी का 2022 में करीब 7,000 रुपये का चालान कट चुका था और वर्तमान में इसकी आरसी (RC) भी सीज बताई जा रही है।
  • वीआईपी काफिला: ट्रोलर्स ने यह भी सवाल उठाया कि मंत्री जी तो स्कूटी पर थे, लेकिन उनके पीछे सुरक्षाकर्मियों की गाड़ियों का पूरा काफिला चल रहा था, जिससे ईंधन बचाने का मूल उद्देश्य ही खत्म हो गया। 
मंत्री की सफाई और विपक्षी हमला
मामला तूल पकड़ते ही  रिपोर्ट के अनुसार मंत्री गणेश जोशी ने स्पष्ट किया कि वह स्कूटी उनके स्टाफ (PSO) की थी और उन्हें दस्तावेजों की स्थिति का पता नहीं था। उन्होंने बाद में बताया कि दस्तावेजों को तुरंत रिन्यू करा लिया गया है। 
दूसरी ओर, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरा है। विपक्ष का कहना है कि एक तरफ परिवहन विभाग आम जनता के भारी-भरकम चालान काट रहा है, वहीं दूसरी तरफ कानून बनाने वाले खुद बिना वैध कागजों के वाहन दौड़ा रहे हैं।

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