नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और चार यूरोपीय महाशक्तियों—नीदरलैंड्स, स्वीडन, नॉर्वे और इटली—की छह दिवसीय अत्यंत व्यस्त और महत्वपूर्ण आधिकारिक यात्रा पूरी कर 21 मई 2026 को नई दिल्ली लौट आए हैं रिपोर्ट के अनुसार, अपनी इस पांच देशों की विदेश यात्रा के अंतिम पड़ाव रोम (इटली) से रवाना होकर प्रधानमंत्री का विशेष विमान राष्ट्रीय राजधानी में लैंड हुआ। स्वदेश लौटने के बाद प्रधानमंत्री ने इस पूरी यात्रा को अत्यंत सफल और व्यावहारिक बताते हुए कहा कि इटली के साथ द्विपक्षीय संबंधों को अपग्रेड कर ‘विशेष रणनीतिक साझेदारी’ (Special Strategic Partnership) में बदलना भारत के वैश्विक हितों के लिए एक मील का पत्थर है। 
इस ऐतिहासिक बहुपक्षीय कूटनीतिक यात्रा के दौरान भारत ने सेमीकंडक्टर, हरित ऊर्जा, रक्षा विनिर्माण, क्रिटिकल मिनरल्स और वैश्विक व्यापार जैसे प्रमुख क्षेत्रों में दूरगामी समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। 

इटली यात्रा की बड़ी उपलब्धियां और मेलोनी से मुलाकात
रिपोर्ट के अनुसार, रोम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता बेहद सफल रही। दोनों देशों ने अपने रिश्तों को एक नई ऊंचाई दी: 
  • विशेष रणनीतिक साझेदारी का ऐलान: पीएम मोदी ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि दोनों देशों ने अपने संबंधों को अपग्रेड किया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत और इटली अब ‘डिजाइन एंड डेवलप इन इंडिया एंड इटली, एंड डिलीवर फॉर द वर्ल्ड’ (भारत और इटली में डिजाइन व विकास करें और दुनिया को सौंपें) के सिद्धांत पर आगे बढ़ेंगे।
  • जॉइंट स्ट्रैटेजिक एक्शन प्लान (2025-2029): दोनों नेताओं ने भविष्य की रणनीतिक साझेदारी को व्यावहारिक और भविष्योन्मुखी ढांचा प्रदान करने के लिए इस 5 वर्षीय एक्शन प्लान की प्रगति की समीक्षा की।
  • द्विपक्षीय व्यापार का ₹20 बिलियन यूरो का लक्ष्य: बैठक में भारत-इटली द्विपक्षीय व्यापार को साल 2029 तक 20 बिलियन यूरो तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता दोहराई गई। वर्तमान में भारत में 800 से अधिक इतालवी कंपनियां सक्रिय रूप से काम कर रही हैं।
  • रक्षा औद्योगिक रोडमैप (Defense Industrial Roadmap): इस नए रोडमैप ने रक्षा क्षेत्र में सह-विकास और सह-उत्पादन के नए रास्ते खोल दिए हैं। साथ ही दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग योजना 2026-27 को मजबूती मिली है।
  • महत्वपूर्ण खनिज और कृषि पर समझौता: भारत और इटली ने क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिजों) और कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में सहयोग के लिए महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए।
  • पर्यटन वर्ष 2027: दोनों देशों ने सांस्कृतिक और लोगों से लोगों के जुड़ाव को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2027 को “भारत-इटली संस्कृति और पर्यटन वर्ष” के रूप में मनाने की घोषणा की है।
  • आईएमईसी (IMEC Corridor) पर जोर: दोनों प्रधानमंत्रियों ने ‘भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर’ (IMEC) परियोजना के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और इसकी पहली मंत्रिस्तरीय बैठक 2026 में ही आयोजित करने को कहा।

यात्रा के अन्य पड़ाव: यूएई से लेकर नॉर्डिक देशों तक
 रिपोर्ट के अनुसार, 15 मई को शुरू हुई इस छह दिवसीय यात्रा के बाकी चार पड़ाव भी भारत की ऊर्जा और तकनीक सुरक्षा के लिहाज से ऐतिहासिक रहे:
संयुक्त अरब अमीरात (UAE): यात्रा के पहले चरण में पीएम मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात की। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच यह बैठक ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और लॉजिस्टिक्स को मजबूत करने के लिहाज से बेहद संवेदनशील और सफल रही।


नीदरलैंड्स (Netherlands): नीदरलैंड्स के दौरे पर मुख्य फोकस सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी और उन्नत अनुसंधान साझेदारी पर रहा। भारत ने डच कंपनियों को भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और चिप निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र में निवेश करने के लिए आमंत्रित किया।


स्वीडन (Sweden): स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन के साथ बैठक में दोनों देशों ने संयुक्त नवाचार साझेदारी के दूसरे चरण और ‘भारत-स्वीडन टेक्नोलॉजी और एआई कॉरिडोर’ शुरू करने पर सहमति जताई। स्वीडन ने द्विपक्षीय व्यापार को आगामी 5 वर्षों में दोगुना करने का लक्ष्य रखा।


नॉर्वे (Norway): नॉर्वे की यात्रा 1983 के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली यात्रा थी। भारत और नॉर्वे ने ‘ग्रीन स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप’ की घोषणा की और कुल 12 बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इनमें ग्रीन हाइड्रोजन, पवन ऊर्जा और इसरो (ISRO) के साथ अंतरिक्ष अनुसंधान के शांतिपूर्ण उपयोग के समझौते शामिल हैं। 


वैश्विक शांति के लिए कूटनीति पर बल
इटली में मीडिया से बात करते हुए और सोशल मीडिया पर अपनी यात्रा के मुख्य अंश साझा करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने यूक्रेन और पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) के संकटों का भी उल्लेख किया। उन्होंने वैश्विक मंच पर भारत का रुख साफ करते हुए एक बार फिर दोहराया कि “बातचीत और कूटनीति ही किसी भी अंतरराष्ट्रीय विवाद को सुलझाने और आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता है।” इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी ने भी माना कि भारत के साथ यह विशेष रणनीतिक साझेदारी दोनों देशों के आपसी भरोसे और साझा लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित है। 

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