देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के प्रेमनगर क्षेत्र में हुए बहुचर्चित पुलिस एनकाउंटर में मारे गए कुख्यात बदमाश अकरम अली की मौत के मामले में अब प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। देहरादून के जिलाधिकारी सविन बंसल ने इस पूरे एनकाउंटर की मजिस्ट्रियल जांच (Magisterial Inquiry) के आदेश जारी कर दिए हैं। जिलाधिकारी ने इस मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच के लिए नगर मजिस्ट्रेट प्रत्यूष सिंह को जांच अधिकारी (Inquiry Officer) नियुक्त किया है।
यह प्रशासनिक कदम अकरम के परिजनों और उसके वकील द्वारा पुलिस की कहानी पर उठाए गए गंभीर सवालों और एनकाउंटर को “फर्जी” बताए जाने के बाद उठाया गया है। जिला प्रशासन इस जांच के माध्यम से मुठभेड़ की सभी परिस्थितियों, पुलिस की जवाबी कार्रवाई की वैधानिकता और मानवाधिकार मानदंडों के पालन की गहनता से समीक्षा करेगा।
क्या था पूरा मामला और पुलिस का दावा?
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, यह घटना 29-30 अप्रैल 2026 की रात को देहरादून के प्रेमनगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत पौंधा रोड पर घटित हुई थी। पुलिस का दावा है कि उत्तर प्रदेश के शामली जिले के बुंटा गांव का रहने वाला 36 वर्षीय अकरम अपने दो अन्य साथियों के साथ गुजरात नंबर की एक कार में सवार होकर आया था। इन बदमाशों ने देवराज नामक एक ठेकेदार पर जानलेवा हमला कर उससे लगभग ₹2 लाख की नकदी लूट ली थी।
लूट की सूचना मिलते ही थाना प्रभारी (SHO) नरेश राठौर के नेतृत्व में प्रेमनगर पुलिस टीम ने बदमाशों की घेराबंदी शुरू की। खुद को घिरा देख बदमाशों ने पुलिस टीम पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी और अपनी कार छोड़कर पौंधा के घने जंगलों की तरफ भागने लगे। इस दौरान बदमाशों की एक गोली थाना प्रभारी नरेश राठौर के हाथ में लगी, जिससे वे घायल हो गए। पुलिस ने आत्मरक्षार्थ जवाबी फायरिंग की, जिसमें अकरम को गोलियां लगीं, जबकि उसके दो साथी अंधेरे का फायदा उठाकर जंगल के रास्ते फरार होने में कामयाब रहे। घायल अकरम को तुरंत कोरोनेशन अस्पताल ले जाया गया, जहाँ इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। पुलिस ने मौके से एक देशी पिस्टल, एक तमंचा और लूटी गई शत-प्रतिशत नकदी बरामद करने का दावा किया था।
परिजनों के गंभीर आरोप: करोड़ों की जमीन का विवाद या साज़िश?
एनकाउंटर के तुरंत बाद अकरम के परिवार और उसके वकील राजवीर सिंह ने पुलिस की इस थ्योरी को सिरे से खारिज करते हुए इसे एक “सुनियोजित हत्या” करार दिया था। अकरम की पत्नी इशरत और उसके भाई मुकर्रम ने आरोप लगाया कि यह एनकाउंटर किसी लूट के कारण नहीं, बल्कि करोड़ों रुपये की जमीन के लेनदेन और पारिवारिक संपत्ति विवाद के चलते किया गया है। परिवार का दावा है कि अकरम के पास देहरादून क्षेत्र में करोड़ों रुपये की बेकीमती जमीन का मामला चल रहा था, जिसे लेकर कुछ लोग उसके पीछे पड़े थे।
इसके अलावा, अकरम के वकील ने यह सनसनीखेज खुलासा किया कि अकरम घटना वाले दिन दोपहर ढाई बजे तक अदालत से जुड़े काम के सिलसिले में उनके साथ था। उसे गुरुवार (30 अप्रैल) को देहरादून की स्थानीय अदालत में एक पुराने मामले की पेशी पर आना था। वकील का कहना है कि जब कोई व्यक्ति खुद अदालत में पेश होने आ रहा हो, तो वह पेशी से ठीक कुछ घंटे पहले उसी शहर में लूट जैसी दुस्साहसिक वारदात को क्यों अंजाम देगा? परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि अकरम को आईएसबीटी के पास से पुलिस ने अवैध रूप से उठाया और बाद में जंगल में ले जाकर एनकाउंटर की झूठी कहानी गढ़ दी।
मजिस्ट्रियल जांच के मुख्य बिंदु
जिलाधिकारी सविन बंसल के आदेश के बाद नियुक्त किए गए जांच अधिकारी, नगर मजिस्ट्रेट प्रत्यूष सिंह निम्नलिखित महत्वपूर्ण बिंदुओं पर अपनी रिपोर्ट तैयार करेंगे:
- घटनास्थल का निरीक्षण व साक्ष्य: पुलिस और बदमाशों के बीच हुई फायरिंग के दौरान गोलियों के खोखे, दूरियां और फॉरेंसिक साक्ष्यों का मिलान किया जाएगा।
- सीसीटीवी और कॉल डिटेल: एनकाउंटर से पहले अकरम की लोकेशन कहां थी, इसके लिए आईएसबीटी, प्रेमनगर और पौंधा रोड के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जाएंगे तथा उसकी कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की जांच होगी।
- पोस्टमार्टम रिपोर्ट की समीक्षा: अकरम के शरीर पर लगी गोलियों के निशान, उनके प्रवेश और निकास के कोण (Angles) से यह साफ किया जाएगा कि गोली कितनी दूरी से और किस परिस्थिति में चली।
- परिजनों व गवाहों के बयान: मृतक के परिजनों द्वारा लगाए गए जमीन विवाद और अवैध हिरासत के आरोपों के संबंध में उनके बयान दर्ज किए जाएंगे।
- पुलिस और मजिस्ट्रियल समानांतर जांच: एक तरफ जहां नगर मजिस्ट्रेट प्रशासनिक व मजिस्ट्रियल स्तर पर जांच कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ एसएसपी प्रमेंद्र सिंह डोबाल के निर्देश पर पुलिस विभाग भी इसकी आंतरिक जांच करा रहा है, जिसकी कमान एसपी सिटी हरिद्वार को सौंपी गई है।
अकरम का पुराना आपराधिक इतिहास
यद्यपि इस एनकाउंटर पर सवाल उठ रहे हैं, लेकिन देहरादून पुलिस का कहना है कि अकरम एक अत्यंत शातिर और वांछित अपराधी था। वह साल 2014 के देहरादून के बालावाला में हुए बहुचर्चित अंकित थपलियाल हत्याकांड और डकैती मामले का मुख्य आरोपी था, जिसमें उसने एक कृषि अधिकारी के युवा बेटे की गोली मारकर हत्या कर दी थी। अकरम पर उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के विभिन्न थानों में हत्या, डकैती, गैंगस्टर एक्ट और पॉक्सो (POCSO) अधिनियम के तहत लगभग 14 से 16 संगीन मुकदमे दर्ज थे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी घटना के बाद राज्य में अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन प्रहार’ को और तेज करने की बात कही थी।
अब देखना यह होगा कि नगर मजिस्ट्रेट प्रत्यूष सिंह की इस मजिस्ट्रियल जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और क्या देहरादून पुलिस की एनकाउंटर थ्योरी सही साबित होती है या परिजनों के आरोपों में कोई सच्चाई निकलती है।