देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चारधाम यात्रा व्यवस्थाओं की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान बड़ा फैसला लेते हुए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि देश-विदेश से देवभूमि आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुगम दर्शन सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। वर्तमान यात्रा सीजन में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मुख्यमंत्री ने मानक प्रचालन प्रक्रिया (SOP) को और अधिक सख्त बनाने तथा कड़ाई से लागू करने के निर्देश दिए हैं। सीएम धामी ने कहा कि चारधाम यात्रा प्रबंधन का मूल मंत्र ‘सुरक्षित यात्रा, सुगम दर्शन व सतत संवाद’ होना चाहिए। 
रात्रिकालीन वाहनों की आवाजाही पर पूर्ण प्रतिबंध 
  • पहाड़ी और संवेदनशील मार्गों पर हादसों को रोकने के लिए सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। 
  • उत्तराखंड परिवहन विभाग के नए नियमों के तहत रात 10:00 बजे से सुबह 4:00 बजे तक यात्रा मार्गों पर वाहनों का संचालन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। 
  • रात के समय केवल आपातकालीन सेवाओं और पास धारक वाहनों को ही विशेष परिस्थितियों में अनुमति मिलेगी।
  • विजिबिलिटी कम होने, तीखे मोड़ों और लैंडस्लाइड (भूस्खलन) के खतरों को देखते हुए पुलिस को इस नियम का कड़ाई से पालन कराने को कहा गया है। 
स्वास्थ्य जांच और मेडिकल स्क्रीनिंग अनिवार्य
  • हाई-अल्टीट्यूड (उच्च हिमालयी क्षेत्रों) में ऑक्सीजन की कमी से होने वाली मौतों को रोकने के लिए सख्त हेल्थ प्रोटोकॉल लागू किए गए हैं। 
  • केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री जाने वाले सभी तीर्थयात्रियों, विशेषकर बुजुर्गों और गंभीर बीमारी से ग्रसित लोगों की गहन मेडिकल स्क्रीनिंग की जाएगी। 
  • सांस और हृदय रोग से पीड़ित यात्रियों को पूरी तरह फिट होने का प्रमाण पत्र मिलने के बाद ही आगे जाने दिया जाएगा। 
  • सरकार ने गंभीर रूप से बीमार मरीजों को तुरंत एयरलिफ्ट करने के लिए एक राज्य स्तरीय नोडल अधिकारी के तहत हेली-एम्बुलेंस सेवा तैनात की है। 
  • केदारनाथ पैदल मार्ग और अन्य मुख्य पड़ावों पर पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन सिलेंडर, फर्स्ट-एड किट्स और रिलीफ पोस्ट स्थापित किए गए हैं। [
भीड़ नियंत्रण और डिजिटल मॉनिटरिंग व्यवस्था
  • यात्रा के पहले महीने में ही रिकॉर्ड 20.5 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं और ऑनलाइन पंजीकरण का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है।
  • भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हर धाम में प्रतिदिन दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की एक निश्चित संख्या तय की जाएगी।
  • बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने मंदिर परिसरों और गर्भगृह के भीतर मोबाइल फोन और कैमरों के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है।
  • एंट्री चेकपॉइंट्स पर आधार कार्ड से लिंक रजिस्ट्रेशन स्लिप का मिलान करने के बाद ही प्रवेश की अनुमति दी जा रही है।
  • संवेदनशील रूटों पर यात्रियों की सुरक्षा के लिए चप्पे-चप्पे पर अतिरिक्त कैमरे और हाईटेक कंट्रोल रूम से रियल-टाइम ट्रैकिंग की जा रही है। 
घोड़े-खच्चरों के लिए नई एसओपी और ओवररेटिंग पर रोक 
  • यमुनोत्री और केदारनाथ के पैदल ट्रैक पर चलने वाले घोड़े-खच्चरों के लिए भी इस बार बेहद सख्त नियम बनाए गए हैं।
  • पशु क्रूरता रोकने, ओवरलोडिंग पर लगाम लगाने और बीमार पशुओं का संचालन रोकने पर सीधे एफआईआर (FIR) और लाइसेंस रद्दीकरण की कार्रवाई होगी।
  • यमुनोत्री ट्रैक पर एक समय में केवल 600 पशुओं के संचालन की रोटेशन प्रणाली लागू की गई है।
  • मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि यात्रा मार्ग के होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों में रेट लिस्ट का अनिवार्य प्रदर्शन कराया जाए।
  • खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमों द्वारा लगातार रैंडम सैंपलिंग और चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। 
अधिकारियों को जवाबदेही और आपदा प्रबंधन के निर्देश 
  • सीएम धामी ने गढ़वाल आयुक्त, आईजी गढ़वाल, और सभी संबंधित जिलाधिकारियों (डीएम) तथा पुलिस अधीक्षकों (एसपी) को मैदान पर मुस्तैद रहने के निर्देश दिए हैं।
  • यात्रा मार्गों पर स्वच्छता व्यवस्था और प्लास्टिक बैन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है, जिसके तहत कचरा प्रबंधन के कड़े नियम लागू हैं।
  • मानसून की आहट को देखते हुए लोक निर्माण विभाग (PWD) और बीआरओ (BRO) को संवेदनशील भूस्खलन वाले क्षेत्रों में जेसीबी मशीनें और रेस्क्यू टीमें अलर्ट मोड पर रखने को कहा गया है ताकि मार्ग बंद होने पर तुरंत खोला जा सके।

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