देहरादून: उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने संगठन के प्रति वफादार पार्टी कार्यकर्ताओं, पूर्व सैनिकों और वरिष्ठ नेताओं को बड़ी सौगात दी है. मंत्रिमंडल विस्तार के बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि संगठन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले चेहरों को प्रशासनिक और संवैधानिक पदों पर मौका दिया जाएगा. आखिरकार लंबे इंतजार के बाद शासन द्वारा आधिकारिक आदेश जारी कर दिए गए हैं, जिसके तहत कई महत्वपूर्ण निगमों, परिषदों, समितियों और आयोगों में नई नियुक्तियां की गई हैं.
इस फैसले के बाद उत्तराखंड भाजपा के भीतर और कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है. सरकार ने इन नियुक्तियों के जरिए यह साफ संदेश दिया है कि जो लोग जमीन पर रहकर संगठन के लिए पूरी निष्ठा से काम कर रहे हैं, उन्हें सरकार में भी पूरा मान-सम्मान और भागीदारी दी जाएगी.
वरिष्ठ नेताओं और कांग्रेस से आए चेहरों को मिला तवज्जो
धामी सरकार की इस नई सूची की सबसे खास और राजनीतिक रूप से सबसे चर्चित बात यह रही कि इसमें कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हुए वरिष्ठ नेताओं को भी बड़ा स्थान दिया गया है.
    • सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि जो वरिष्ठ नेता अन्य दलों को छोड़कर राष्ट्रवाद और राज्य के विकास की मुख्यधारा से जुड़े हैं, उनके अनुभव का राज्यहित में पूरा उपयोग किया जाएगा.
    • इस सूची में सबसे प्रमुख नाम पूर्व कैबिनेट मंत्री दिनेश अग्रवाल का है, जिन्हें सरकार ने अपनी नई योजना और नीति निर्माण संस्था ‘सेतु आयोग’ में सलाहकार के रूप में नामित कर बेहद महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है.
    • इसके साथ ही कांग्रेस से आए एक और वरिष्ठ नेता जोत सिंह बिष्ट को भी अहम दायित्व देकर पुरस्कृत किया गया है.

विभिन्न परिषदों और बोर्डों में मिली बड़ी जिम्मेदारी
मंत्रिपरिषद अनुभाग द्वारा संयुक्त सचिव आलोक कुमार सिंह के अनुमोदन और उप सचिव विवेक कुमार जैन के हस्ताक्षर से जारी इन आधिकारिक आदेशों के अनुसार, कुल 18 भाजपा नेताओं और प्रमुख चेहरों को राज्य के अलग-अलग विभागों के अंतर्गत दायित्व सौंपे गए हैं.
    1. हुकम सिंह कुंवर: इन्हें राज्य निर्माण आंदोलनकारी सम्मान परिषद का अध्यक्ष बनाकर कैबिनेट स्तर जैसी अहम जिम्मेदारी दी गई है. उत्तराखंड राज्य आंदोलन से जुड़े लोगों के अधिकारों और कल्याण की दिशा में यह पद बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है.
    2. दिनेश अग्रवाल: पूर्व कैबिनेट मंत्री दिनेश अग्रवाल को नवनिर्मित राज्य सेतु आयोग (सस्टेनेबल डेवलपमेंट एंड ट्रांसफॉर्मेटिव अटरलैंड्स) का सलाहकार नियुक्त किया गया है.
    3. जोत सिंह बिष्ट: वरिष्ठ नेता जोत सिंह बिष्ट को भी सरकार के भीतर एक महत्वपूर्ण परिषद का अहम जिम्मा सौंपा गया है, जिससे क्षेत्र में पार्टी को और मजबूती मिलेगी.
    4. इसके अतिरिक्त सूची में पूर्व सैनिकों, महिला पदाधिकारियों और क्षेत्रीय व जातीय समीकरणों को संतुलित करते हुए कई अन्य भाजपा नेताओं को विभिन्न बोर्डों में उपाध्यक्ष और निदेशक के पदों पर नामित किया गया है.

नवनियुक्त पदाधिकारियों को मिलेंगी ये सरकारी सुविधाएं
शासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के मुताबिक, इन पदों पर मनोनीत किए गए सभी पदाधिकारियों को नियमानुसार वाहन, कार्यालय, भत्ते और अन्य आवश्यक सरकारी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी. इन सभी सुविधाओं पर होने वाला वित्तीय व्यय भार संबंधित विभागों और परिषदों द्वारा वहन किया जाएगा. सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों के विस्तृत कार्यक्षेत्र, अधिकारों, कर्तव्यों और उनकी सेवा अवधि के संबंध में संबंधित प्रशासकीय विभाग बहुत जल्द अलग से विस्तृत शासनादेश जारी करेंगे.
राजनैतिक मायने और समीकरण साधने की कोशिश
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि धामी सरकार का यह कदम केवल कार्यकर्ताओं को खुश करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके गहरे राजनैतिक मायने हैं. राज्य में आगामी चुनावों और सांगठनिक मजबूती को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गढ़वाल और कुमाऊं दोनों ही मंडलों के बीच एक सटीक संतुलन बिठाने का प्रयास किया है.
लंबे समय से जिन कार्यकर्ताओं ने विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों और जिलों में जमीनी स्तर पर पार्टी का झंडा बुलंद रखा था, उन्हें इन आयोगों और समितियों में जगह देकर सरकार ने उनके मनोबल को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है. वहीं, मुख्यमंत्री धामी ने सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों को अपनी शुभकामनाएं प्रेषित की हैं और उम्मीद जताई है कि वे अपने-अपने विभागों के माध्यम से जनता तक सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को पहुंचाने का काम पूरी ईमानदारी से करेंगे.

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