ओस्लो: भारतीय शतरंज के दो सबसे बड़े युवा सितारों के बीच चल रही शह और मात की महाजंग में आर प्रज्ञानंदा (R Praggnanandhaa) ने बाजी मार ली है।  रिपोर्ट के अनुसार, प्रतिष्ठित नॉर्वे शतरंज टूर्नामेंट 2026 (Norway Chess 2026) के नौवें और पेनल्टीमेट (उपकलासिक) राउंड में प्रज्ञानंदा ने मौजूदा विश्व चैंपियन डी गुकेश (D Gukesh) को क्लासिकल मुकाबले में शिकस्त देकर इतिहास रच दिया। काले मोहरों (Black Pieces) से खेलते हुए प्रज्ञानंदा ने यह मुकाबला महज 34 चालों में अपने नाम कर पूरे 3 अंक हासिल किए, जिसने उन्हें खिताब जीतने की रेस में बेहद मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। 
इस ऐतिहासिक जीत के साथ प्रज्ञानंदा ने टूर्नामेंट के पांचवें दौर में गुकेश के हाथों मिली अपनी पिछली हार का बदला भी ले लिया। उनकी इस शानदार जीत ने न केवल भारतीय प्रशंसकों को रोमांचित किया है, बल्कि वैश्विक स्तर पर उनके बढ़ते कद को एक बार फिर साबित किया है।
गुकेश की एक बड़ी गलती और प्रज्ञानंदा का ‘काला जादू’
रिपोर्ट के मुताबिक, यह मुकाबला शुरुआत से ही बेहद आक्रामक और रणनीतिक रहा। दोनों दिग्गजों के बीच का खेल पहले 14 चालों तक 2025 के टाटा स्टील चेस के एक प्रसिद्ध मुकाबले की तर्ज पर आगे बढ़ रहा था।
  • प्रज्ञानंदा की नई चाल: प्रज्ञानंदा ने अपनी 13वीं चाल में ‘f5’ खेलकर खेल में एक नया ट्विस्ट (नवेल्टी) पेश किया।
  • गुकेश का ब्लंडर: विश्व चैंपियन डी गुकेश इस नई चाल के दबाव में आ गए और उन्होंने 14वीं चाल में ‘g4’ खेलकर एक बड़ी रणनीतिक भूल कर दी, जिससे उनका हाथी (Rook) असुरक्षित हो गया और सफेद मोहरों की स्थिति कमजोर हो गई। 
  • एकतरफा अंत: हालांकि 20 वर्षीय गुकेश ने बोर्ड के मध्य भाग को खोलकर वापसी करने का प्रयास किया, लेकिन एक मोहरा (Piece) पिछड़ जाने के बाद उनकी स्थिति पूरी तरह बिखर गई। प्रज्ञानंदा ने बिना कोई गलती किए बेहद सटीक चालें चलीं और अंततः 34वीं चाल में गुकेश को हार मानने पर मजबूर कर दिया। 

जीत के बाद क्या बोले प्रज्ञानंदा?
 प्रज्ञानंदा ने अपनी खुशी जाहिर की और समय प्रबंधन पर बात की।
“मुझे इस खेल पर सचमुच गर्व है क्योंकि आमतौर पर मैं गुकेश के खिलाफ इसी तरह के मैचों में हार जाता था। वह कुछ बेहद अनोखा और रचनात्मक करते थे, और मैं ज्यादा सोचने (ओवरथिंकिंग) के चक्कर में खुद गलती कर बैठता था। इस बार मैंने अपने समय का बेहतर प्रबंधन किया और मेरी गणना (कैलकुलेशन) भी सटीक रही।” — आर प्रज्ञानंदा

लगातार तीन जीत के साथ अंक तालिका में मारी छलांग
 रिपोर्ट के अनुसार, प्रज्ञानंदा इस टूर्नामेंट की शुरुआत में पिछड़कर अंक तालिका में काफी नीचे चल रहे थे। लेकिन इसके बाद उन्होंने अदभुत वापसी करते हुए क्लासिकल शतरंज में लगातार तीन मुकाबले जीते:
  1. अलीरेजा फिरौज्जा (Alireza Firouzja) को मात दी।
  2. दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन (Magnus Carlsen) को उनके घर में हराकर चौंकाया।
  3. नौवें दौर में विश्व चैंपियन डी गुकेश को पराजित किया। 
इस शानदार हैट्रिक की बदौलत प्रज्ञानंदा के 15 अंक हो गए हैं और वह शीर्ष पर काबिज अमेरिका के वेस्ली सो (15.5 अंक) से महज आधा अंक पीछे दूसरे स्थान पर पहुंच गए हैं। इस जीत ने उन्हें नॉर्वे शतरंज का खिताब जीतने वाला पहला भारतीय खिलाड़ी बनने के बेहद करीब ला खड़ा किया है।

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