अमेरिका और ईरान के बीच फिर छिड़ी जंग; सीजफायर का हुआ उल्लंघन, खाड़ी देशों पर दागी मिसाइलें
मुख्य समाचार विस्तार से:
1. सीजफायर टूटने से बढ़ा तनाव
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा तनाव एक बार फिर हिंसक युद्ध में बदल गया है. जून 2026 के पहले सप्ताह में दोनों देशों के बीच जारी नाजुक संघर्ष विराम (सीजफायर) पूरी तरह टूट चुका है. अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों  ताजा अपडेट्स के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ईरान के तटीय रडार और निगरानी ठिकानों पर रात के समय भीषण हमले किए हैं. ईरान के विदेश मंत्रालय ने इसे अपनी संप्रभुता का खुला उल्लंघन बताते हुए अमेरिका की कड़ी निंदा की है. 
2. होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, ईरानी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाने के लिए ड्रोन लॉन्च किए थे. इसके जवाब में अमेरिकी वायुसेना के F-15E स्ट्राइक ईगल विमानों ने दक्षिणी ईरान के सिरीक (Sirik) और केश्म द्वीप (Qeshm Island) में स्थित ईरानी रडार ठिकानों को बमबारी कर नष्ट कर दिया. अमेरिकी रक्षा मंत्रालय का दावा है कि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय नौवहन मार्ग की सुरक्षा के लिए यह कदम उठाया है. 
3. ईरान का जवाबी हमला: कुवैत और बहरीन पर दागीं बैलिस्टिक मिसाइलें
अमेरिकी हमलों के कुछ ही घंटों बाद, ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगी देशों पर जोरदार जवाबी कार्रवाई की. ईरान की सेना ने कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और हवाई अड्डों को निशाना बनाकर कई बैलिस्टिक मिसाइलें और वन-वे अटैक ड्रोन दागे. अमेरिकी सैन्य बलों ने दावा किया है कि उन्होंने बहरीन और कुवैत की ओर आ रही 7 बैलिस्टिक मिसाइलों और 4 घातक ईरानी ड्रोनों को हवा में ही मार गिराया है. इस हमले के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है. 
4. शांति वार्ता विफल, ट्रंप की नई शर्तें
रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देशों के बीच चल रही शांति वार्ता पूरी तरह से ठप हो गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संघर्ष विराम के समझौते में कुछ कड़े बदलावों की मांग की थी, जिसे ईरान ने मानने से साफ इनकार कर दिया है. ईरान का कहना है कि अमेरिका लगातार अपनी मांगें बदल रहा है और खाड़ी क्षेत्र की स्थिरता को नुकसान पहुंचा रहा है. ट्रंप ने एक बयान में कहा कि वह ईरान के इस रवैये से निपटने के लिए बेहद सख्त रास्ता अपनाने को भी तैयार हैं. 
5. ईरान की संपत्तियों को जब्त करने की अमेरिकी योजना
अमेरिकी विदेश और वित्त मंत्रालय (US Treasury) अब ईरान पर आर्थिक शिकंजा और कसने की तैयारी में है.  सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट ने एक टीम को खाड़ी देशों में ईरानी हमलों से हुए नुकसान का आकलन करने का निर्देश दिया है. अमेरिका का इरादा है कि वह विदेशों में फ्रीज (जब्त) की गई ईरानी संपत्तियों और अमेरिकी नौसेना द्वारा पकड़े गए ईरानी तेल टैंकरों का इस्तेमाल अपने सहयोगी देशों जैसे कुवैत और बहरीन के पुनर्निर्माण के लिए करेगा. 
6. संयुक्त राष्ट्र की चिंता और वैश्विक खाद्य संकट का खतरा
इस युद्ध के कारण दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का 20% तेल और गैस का व्यापार होता है, जिसे ईरान ने आंशिक रूप से ब्लॉक कर दिया है. संयुक्त राष्ट्र (UN) और विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने चेतावनी दी है कि अमेरिका-ईरान युद्ध के लंबा खींचने के कारण दुनिया के कई देशों में खाद्य और ईंधन संकट गहरा सकता है, जिससे लाखों लोग प्रभावित होंगे. पाकिस्तान और अन्य पड़ोसी देश इस मामले में मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल युद्ध रुकने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed