उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने उत्तराखंड अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों संबंधी मान्यता नियमावली-2026 को कैबिनेट से औपचारिक मंजूरी दे दी है। इस नई नियमावली के तहत राज्य में पहली बार सभी छह अल्पसंख्यक समुदायों—मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, जैन और पारसी को एक ही शैक्षिक नियामक दायरे में लाया गया है। 
इस नई व्यवस्था के तहत 1 जुलाई 2026 से उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा। इसके स्थान पर गठित उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण ही अब प्रदेश के सभी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों (मदरसों सहित) की मान्यता, संचालन और वित्तीय अनुशासन की निगरानी करेगा।
 समाचार का मुख्य विवरण (Key Highlights)
  • नया प्राधिकरण: राज्य में मदरसा बोर्ड की जगह अब उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण काम करेगा। 
  • संबद्धता (Affiliation): सभी मान्यता प्राप्त अल्पसंख्यक संस्थानों और मदरसों को उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद् (Uttarakhand Board) से संबद्ध होना अनिवार्य होगा। 
  • मुख्यधारा का पाठ्यक्रम: मदरसों सहित सभी संस्थानों में राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF) और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत सामान्य विज्ञान, गणित, और सामाजिक विज्ञान जैसे मुख्य विषय पढ़ाना अनिवार्य होगा। 
  • धार्मिक व भाषाई अध्ययन की छूट: मुख्य पाठ्यक्रम के अतिरिक्त संस्थान अपनी पसंद के धार्मिक विषय या भाषाएं (जैसे गुरुमुखी, पाली, अरबी आदि) पढ़ा सकेंगे, लेकिन उनके मानक प्राधिकरण द्वारा तय होंगे। 

मदरसे छोड़ अन्य अल्पसंख्यक संस्थानों में कैसे लागू होगी नियमावली?
विपक्ष और विभिन्न शैक्षणिक संगठनों द्वारा इस बात को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे कि मदरसों के अतिरिक्त जो अन्य अल्पसंख्यक संस्थान (जैसे ईसाई मिशनरी स्कूल, सिख या जैन स्कूल) पहले से चल रहे हैं, उन पर यह नियमावली कैसे प्रभावी होगी। सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार इसे इस प्रकार विभाजित किया गया है: 
1. पूर्व से मान्यता प्राप्त और बोर्ड से संबद्ध स्कूलों के लिए नियम 
ईसाई, सिख, जैन या बौद्ध समुदायों द्वारा संचालित अधिकांश कॉन्वेंट और अल्पसंख्यक स्कूल पहले से ही उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड, CBSE या ICSE बोर्ड से संबद्ध हैं। [1]
  • अल्पसंख्यक दर्जे का नवीनीकरण: इन स्थापित संस्थानों को अपनी मुख्यधारा की शिक्षा के लिए कोई नया बदलाव नहीं करना होगा, लेकिन अल्पसंख्यक संस्थान (Minority Status) का लाभ और प्रमाणपत्र बनाए रखने के लिए अब अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के पास ऑनलाइन पंजीकरण कराना होगा। 
  • सोसाइटी और भूमि का स्वामित्व: संस्थान का किसी वैध सोसाइटी, ट्रस्ट या कंपनी एक्ट के तहत पंजीकृत होना अनिवार्य है। इसके साथ ही स्कूल की भूमि, भवन और बैंक खाते उस संस्था के नाम पर होने चाहिए। 
2. भाषाई और धार्मिक विषयों के लिए कड़े मानक
नए कानून के तहत यदि कोई गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यक संस्थान (जैसे सिख या बौद्ध संस्थान) अपने यहाँ अपनी संस्कृति या धर्म से जुड़े विशेष विषय (जैसे गुरुमुखी या पाली भाषा) पढ़ाना चाहता है, तो उसे छूट होगी। 
  • प्राधिकरण की निगरानी: इन अतिरिक्त धार्मिक या भाषाई विषयों की पाठ्यसामग्री और गुणवत्ता का मूल्यांकन प्राधिकरण करेगा।
  • अतिरिक्त प्रमाणपत्र: इन विशिष्ट विषयों के लिए परीक्षाएं आयोजित करने और उनका पृथक प्रमाणपत्र जारी करने की जिम्मेदारी स्वयं संस्थान की होगी, जो मुख्य बोर्ड के सर्टिफिकेट से अलग होगा। 
3. स्टाफ की योग्यता और सामाजिक सौहार्द का परीक्षण
सभी अल्पसंख्यक संस्थानों—चाहे वे मदरसे हों, कॉन्वेंट स्कूल हों या गुरुद्वारे द्वारा संचालित स्कूल—उन सभी के लिए शिक्षकों की न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता (जैसे TET/B.Ed) के सरकारी नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही, संस्थान के भीतर सामाजिक और धार्मिक सौहार्द बनाए रखने की प्रतिबद्धता का कड़ाई से परीक्षण किया जाएगा। यदि किसी भी संस्थान में राष्ट्रविरोधी गतिविधि या सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचाने वाली बातें पाई जाती हैं, तो उसकी मान्यता तुरंत रद्द कर दी जाएगी। 

 मदरसों और अन्य अल्पसंख्यक संस्थानों में मुख्य अंतर

मापदंड  मदरसों के लिए व्यवस्था अन्य अल्पसंख्यक संस्थानों (ईसाई, सिख आदि) के लिए व्यवस्था
वर्तमान स्थिति पूर्व का पृथक मदरसा बोर्ड 1 जुलाई 2026 से पूरी तरह खत्म। ये संस्थान पहले से ही माध्यमिक शिक्षा बोर्ड या अन्य बोर्ड्स से जुड़े हैं।
पाठ्यक्रम में बदलाव अब केवल धार्मिक शिक्षा (दीनी तालीम) नहीं दे सकेंगे; गणित, विज्ञान और अंग्रेजी पढ़ना अनिवार्य होगा। पहले से ही आधुनिक और सामान्य पाठ्यक्रम का पालन कर रहे हैं।
मान्यता की अवधि नए पोर्टल पर आवेदन के बाद प्राथमिक तौर पर 3 वर्ष के लिए मान्यता मिलेगी। स्थापित संस्थानों को केवल अल्पसंख्यक दर्जे के सत्यापन हेतु पंजीकरण करना होगा।
भौतिक निरीक्षण वित्तीय गड़बड़ी और इंफ्रास्ट्रक्चर की कमियों के कारण प्राधिकरण द्वारा कड़ा भौतिक निरीक्षण होगा। सामान्य प्रशासनिक ऑडिट और सोसाइटी नियमों की जांच होगी।

 सरकार का पक्ष और उद्देश्य
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कहना है कि पूर्ववर्ती सरकारों के समय बनाए गए नियमों का झुकाव केवल एक समुदाय विशेष की ओर था। नई नियमावली से राज्य के सभी छह अल्पसंख्यक समुदायों के बच्चों को समान अवसर मिलेंगे। सरकार का प्राथमिक उद्देश्य अल्पसंख्यक संस्थानों के संचालन में पारदर्शिता, जवाबदेही और शैक्षणिक गुणवत्ता (Transparency & Quality Education) सुनिश्चित करना है, ताकि इन संस्थानों से निकलने वाले छात्र भी देश के विकास की मुख्यधारा से जुड़ सकें।

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