नई दिल्ली, 13 जून 2026:
भारतीय निशानेबाजी के इतिहास में मील का पत्थर माने जाने वाले महान पिस्टल शूटर और राष्ट्रीय कोच जसपाल राणा अब हमारे बीच नहीं रहे। मात्र 49 वर्ष की आयु में दिल का दौरा पड़ने के कारण उनका निधन हो गया है। डॉक्टरों के अनुसार, वे गंभीर हृदयाघात और उसके बाद पैदा हुई शारीरिक जटिलताओं (कार्डियक रप्चर) से जंग हार गए। जसपाल राणा अपने पीछे पत्नी और दो बच्चों का रोता-बिलखता परिवार छोड़ गए हैं। 
जर्मनी से लौटते समय विमान में बिगड़ी थी तबीयत
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जसपाल राणा जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ (ISSF) विश्व कप में भारतीय निशानेबाजी दल के साथ गए थे। 1 जून को भारत वापस लौटते समय फ्लाइट के दौरान ही उनके सीने में तेज दर्द उठा और तबीयत काफी खराब हो गई। दिल्ली हवाई अड्डे पर उतरते ही उन्हें तुरंत साकेत स्थित मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
डॉक्टरों का बड़ा खुलासा: 3 दिन पुराना था हार्ट अटैक
अस्पताल के कार्डियक साइंसेज विभाग के ग्रुप चेयरमैन डॉ. बलबीर सिंह ने उनके स्वास्थ्य को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने बताया कि जब जसपाल राणा को अस्पताल लाया गया, तब उनकी स्थिति अत्यंत नाजुक थी। जांच में पता चला कि उन्हें म्यूनिख यात्रा के दौरान ही (लगभग तीन दिन पहले) एक तीव्र (मैसिव) हार्ट अटैक आ चुका था, जिसे उन्होंने सामान्य दर्द या एसिडिटी समझकर नजरअंदाज कर दिया और सफर जारी रखा। देरी से अस्पताल पहुंचने के कारण उनके दिल की एक मुख्य धमनी (आर्टरी) पूरी तरह से ब्लॉक हो चुकी थी और दिल की पंपिंग क्षमता बेहद कमजोर हो गई थी, जिससे वे हार्ट फेल्योर की स्थिति में थे। 
तबीयत में सुधार के बाद नींद में आया ‘कार्डियक रप्चर’
अस्पताल में भर्ती होने के बाद डॉक्टरों ने आपातकालीन प्रक्रिया के तहत उनकी ब्लॉक आर्टरी में स्टेंट डाला था। इलाज का उन पर सकारात्मक असर हुआ और वे तेजी से रिकवर कर रहे थे। उनकी स्थिति में इतना सुधार हो चुका था कि डॉक्टरों ने शुक्रवार (12 जून) को ही उन्हें अस्पताल से छुट्टी (डिस्चार्ज) देने की योजना बना ली थी। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। शुक्रवार सुबह करीब 6:30 बजे, जब वे सो रहे थे, तभी अचानक उनके हृदय की अंदरूनी मांसपेशियां फट गईं (जिसे चिकित्सा भाषा में कार्डियक रप्चर कहा जाता है) और नींद में ही उनका प्राणांत हो गया। डॉक्टरों का कहना है कि हार्ट अटैक के बाद देर से इलाज शुरू होने के कारण कार्डियक रप्चर जैसी जानलेवा जटिलता का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। 
मनु भाकर सहित पूरा खेल जगत स्तब्ध
जसपाल राणा भारत के सबसे सफल हाई-परफॉर्मेंस कोचों में से एक थे। उनके मार्गदर्शन में ही स्टार निशानेबाज मनु भाकर ने 2024 पेरिस ओलंपिक में ऐतिहासिक दो कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचा था। देहरादून में अपने गुरु के पार्थिव शरीर को देखकर मनु भाकर अपने आंसू नहीं रोक सकीं और बुरी तरह बिलख पड़ीं। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “शूटिंग रेंज अब पहले जैसी कभी नहीं लगेगी। वे केवल मेरे कोच और मेंटर नहीं थे, बल्कि एक सच्चे दोस्त थे जो मुझे सबसे बेहतर समझते थे।” 
पीएम मोदी और दिग्गजों ने दी श्रद्धांजलि
जसपाल राणा के असामयिक निधन पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख व्यक्त किया है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा, “श्री जसपाल राणा जी के निधन से अत्यंत दुखी हूँ। उनका जाना भारतीय खेल जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उन्होंने निशानेबाजी में देश को अभूतपूर्व गौरव दिलाया और एक बेहतरीन मेंटर के रूप में युवा एथलीटों को तैयार किया।” इसके अलावा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और पूर्व केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह (जो रिश्ते में उनके ससुर हैं) समेत कई खेल और राजनीतिक हस्तियों ने अपनी शोक संवेदनाएं प्रकट की हैं। 
निशानेबाजी करियर की स्वर्णिम उपलब्धियां
28 जून 1976 को उत्तराखंड के उत्तरकाशी में जन्मे जसपाल राणा ने बेहद कम उम्र में ही देश-दुनिया में अपनी चमक बिखेरी थी। उन्हें भारतीय शूटिंग का ‘गोल्डन बॉय’ कहा जाता था। 
  • राष्ट्रमंडल खेल (CWG): उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स के चार संस्करणों (1994 से 2006) में कुल 15 पदक जीते, जिनमें 9 स्वर्ण पदक शामिल हैं। वे भारत के सबसे सफल राष्ट्रमंडल एथलीटों में गिने जाते हैं।
  • एशियन गेम्स: एशियाई खेलों में उन्होंने 4 स्वर्ण सहित कुल 8 पदक अपने नाम किए। 1994 के हिरोशिमा एशियन गेम्स में तकनीकी खराबी के कारण टूटी हुई पिस्तौल से स्वर्ण पदक जीतने का उनका कारनामा आज भी इतिहास के पन्नों में दर्ज है। 2006 दोहा एशियन गेम्स में उन्होंने 3 स्वर्ण पदक जीतकर विश्व रिकॉर्ड की बराबरी की थी।
  • राष्ट्रीय सम्मान: खेल में उनके अद्वितीय योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें 1994 में अर्जुन पुरस्कार, 1997 में पद्मश्री और 2020 में देश के सर्वोच्च खेल कोचिंग सम्मान द्रौपदी पुरस्कार से नवाजा था।
वाराणसी में होगा अंतिम संस्कार
जसपाल राणा के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए देहरादून स्थित उनके निवास स्थान पर रखा गया, जहां खेल प्रेमियों और स्थानीय नेताओं ने उन्हें नम आंखों से विदाई दी। शनिवार को उनके पार्थिव शरीर को पवित्र नगरी वाराणसी ले जाया जा रहा है, जहां मणिकर्णिका घाट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार संपन्न किया जाएगा। भारतीय खेल इतिहास में उनका योगदान हमेशा अमर रहेगा।

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