देहरादून:
वैश्विक पटल पर भारत की बढ़ती कूटनीतिक और सामरिक शक्ति के बीच हिंद महासागर (Indian Ocean) का महत्व दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भारत सरकार की समुद्री सुरक्षा नीति और ‘ब्लू इकोनॉमी’ (Blue Economy) को बढ़ावा देने वाले अभियानों की सराहना करते हुए कहा कि हिंद महासागर देश की अखंडता और वैश्विक व्यापार का मुख्य आधार है। मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज महासागर क्षेत्र में एक ‘नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर’ (सुरक्षा प्रदाता) के रूप में उभर कर सामने आया है। केंद्र सरकार की नीतियां न केवल मुख्य भूमि की रक्षा कर रही हैं, बल्कि तटीय क्षेत्रों और सीमावर्ती राज्यों के नागरिकों के आर्थिक सशक्तिकरण को भी सुनिश्चित कर रही हैं। 
क्या है ‘सागर’ (SAGAR) और ‘महासागर’ (MAHASAGAR) विजन?
मुख्यमंत्री धामी ने केंद्र सरकार की दो बड़ी रणनीतिक पहलों का विशेष रूप से उल्लेख किया:
  1. SAGAR (Security and Growth for All in the Region): वर्ष 2015 में शुरू की गई इस नीति का मूल उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र के सभी मित्र देशों की सामूहिक सुरक्षा और सतत विकास को बढ़ावा देना है। 
  2. MAHASAGAR विजन: यह भारत की नौसेना और समुद्री सुरक्षा एजेंसियों द्वारा संचालित एक उच्च स्तरीय पहल है, जो हिंद महासागर के द्वीपीय देशों और तटीय पड़ोसी देशों के बीच आपसी विश्वास, सूचनाओं के आदान-प्रदान और आपदा प्रबंधन के लिए सामूहिक तंत्र विकसित करती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि “वसुधैव कुटुंबकम” की भावना के अनुरूप, भारत ने हमेशा यह माना है कि इस क्षेत्र की स्थिरता की मुख्य जिम्मेदारी उन देशों की है जो इसके तटों पर रहते हैं।
हिमालय से लेकर समुद्र तक सुरक्षा का अटूट चक्र
एक संवाद कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि अक्सर लोगों को लगता है कि उत्तराखंड एक लैंडलॉक्ड (चारों तरफ जमीन से घिरा) पर्वतीय राज्य है, इसलिए इसका समुद्र से कोई सीधा संबंध नहीं है। लेकिन यह धारणा पूरी तरह गलत है। उत्तराखंड को “वीर भूमि” कहा जाता है, क्योंकि यहाँ के हजारों युवा भारतीय सेना और भारतीय नौसेना (Indian Navy) में शामिल होकर देश की समुद्री सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं।
सीएम धामी ने कहा, “जब उत्तराखंड का कोई जवान हिंद महासागर या अरब सागर में युद्धपोत पर तैनात होकर देश की रक्षा करता है, तो हिमालय का समुद्र से सीधा और अटूट रिश्ता जुड़ जाता है।” उन्होंने कहा कि देश की सीमाओं की सुरक्षा को टुकड़ों में नहीं देखा जा सकता; चाहे वह उत्तर में हिमालय की बर्फीली चोटियाँ हों या दक्षिण में हिंद महासागर का विशाल जलक्षेत्र, दोनों का सामरिक महत्व बराबर है।
चीन की चुनौतियों के बीच आर्थिक और सामरिक महत्व
रणनीतिक विशेषज्ञों और सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत का 95 प्रतिशत से अधिक व्यापार (मात्रा के हिसाब से) और 68 प्रतिशत मूल्य के हिसाब से समुद्री मार्गों से होता है। इसके अतिरिक्त, देश की ऊर्जा सुरक्षा (कच्चा तेल और गैस आयात) पूरी तरह से हिंद महासागर के शिपिंग लेन पर निर्भर है। हाल के वर्षों में इस क्षेत्र में चीन की बढ़ती आक्रामक उपस्थिति और हिंद महासागर में उसके जहाजों की जासूसी गतिविधियों ने भारत की चिंताएं बढ़ाई हैं।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की दूरदर्शी नीतियों के कारण भारत ने ‘मेजर पोर्ट अथॉरिटीज एक्ट’ जैसे कानूनों के जरिए अपने बंदरगाहों का आधुनिकीकरण किया है। इसके साथ ही, तटीय नौवहन (Coastal Shipping) में पिछले दशक में 118 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। भारत अपने इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत कर चीनी विस्तारवाद की ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ नीति को कड़ा जवाब दे रहा है। 
पर्यावरण और ‘ब्लू इकोनॉमी’ पर विशेष जोर
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यह भी स्पष्ट किया कि हिंद महासागर का महत्व सिर्फ सैन्य सुरक्षा तक सीमित नहीं है। समुद्र के भीतर छिपे मूल्यवान खनिज, मत्स्य पालन (Fisheries) और समुद्री पर्यटन भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में बड़ी भूमिका निभाएंगे। भारत सरकार ने सतत मत्स्य पालन और कोल्ड स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए हजारों करोड़ रुपये का विशेष फंड आवंटित किया है। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखते हुए ‘ग्रीन मैरीटाइम फ्यूचर’ (हरित समुद्री भविष्य) का निर्माण करना आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है, ताकि जलवायु परिवर्तन के खतरों से छोटे द्वीपीय देशों और तटीय मछुआरों के जीवन को सुरक्षित किया जा सके।

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