उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हाल ही में देहरादून नगर निगम (DMC) की महत्वपूर्ण बोर्ड बैठक और कैबिनेट चर्चाओं के बाद पार्षदों के लिए एक बड़ा निर्णय लिया गया है।
समाचार का विस्तृत विवरण:
देहरादून नगर निगम की बोर्ड बैठक में पार्षदों की लंबे समय से चली आ रही मांगों पर मुहर लगाते हुए प्रशासन ने उन्हें वित्तीय रूप से और सशक्त बनाने का निर्णय लिया है। अमर उजाला और स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस फैसले का मुख्य उद्देश्य वार्ड स्तर पर होने वाली छोटी और आपातकालीन समस्याओं का तुरंत समाधान करना है।
मुख्य बिंदु और विस्तृत जानकारी:
  • 10 लाख रुपये का वार्षिक बजट: नगर निगम के प्रत्येक पार्षद को अब अपने वार्ड में विकास कार्यों के लिए 10 लाख रुपये प्रति वर्ष का कोटा दिया जाएगा। यह राशि सीधे तौर पर वार्ड की छोटी-मोटी मरम्मतों और आपातकालीन कार्यों के लिए इस्तेमाल की जा सकेगी।
  • कोटेशन के जरिए काम: पार्षदों को अधिकार दिया गया है कि वे इस बजट का उपयोग कोटेशन प्रक्रिया के माध्यम से कर सकेंगे। इससे लंबी टेंडर प्रक्रियाओं से छुटकारा मिलेगा और काम तेजी से हो सकेंगे।
  • खर्च की सीमा: पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह नियम बनाया गया है कि एक बार में अधिकतम 50,000 रुपये तक का ही काम कराया जा सकता है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि बजट का उपयोग छोटे-छोटे कई कार्यों में समान रूप से हो।
  • आपातकालीन कार्यों में प्राथमिकता: पार्षद रोबिन त्यागी और अन्य सदस्यों ने तर्क दिया था कि बरसात के समय नालियां टूटना या स्ट्रीट लाइट खराब होने जैसी समस्याओं के लिए महीनों तक टेंडर का इंतजार करना पड़ता है। अब इस फंड से ऐसे काम तुरंत हो सकेंगे।
  • मानदेय में वृद्धि: विकास कार्यों के बजट के साथ-साथ, बोर्ड ने पार्षदों का मासिक मानदेय बढ़ाकर 25,000 रुपये करने का प्रस्ताव भी सर्वसम्मति से पारित किया है।
  • सफाई व्यवस्था पर जोर: बैठक में शहर की स्वच्छता को प्राथमिकता देते हुए 715 नए पर्यावरण मित्रों (सफाई कर्मचारियों) की भर्ती को भी मंजूरी दी गई है, ताकि वार्डों में कूड़ा प्रबंधन बेहतर हो सके।
  • अवस्थापना विकास: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस दौरान संकेत दिया कि राज्य सरकार शहरी निकायों को और अधिक आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रही है, ताकि ‘स्मार्ट सिटी’ के विजन को धरातल पर उतारा जा सके।
यह निर्णय देहरादून के स्थानीय प्रशासन में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, जिससे पार्षदों को अपने क्षेत्र की जनता के प्रति अधिक जवाबदेह और सक्षम बनाया जा सकेगा।

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