श्रीनगर/टिहरी:
भारतीय सेना और उत्तराखंड पर्यटन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘सूर्य देवभूमि चैलेंज 2.0’ का सोमवार को भव्य समापन हुआ। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इस समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में श्रीनगर स्थित हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के चौरास परिसर पहुंचे। वहां पहुँचने पर सेना के जवानों, विवि के छात्रों और एनसीसी कैडेटों ने मुख्यमंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया।
प्रतियोगिता का मुख्य आकर्षण और उद्देश्य
सूर्य देवभूमि चैलेंज का यह दूसरा संस्करण साहसिक खेलों के माध्यम से विरासत संरक्षण और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए आयोजित किया गया था।
- चुनौतीपूर्ण मार्ग: प्रतिभागियों ने केदार-बद्री ट्रेल पर हेलंग से कलगोट, कलगोट से मंडल और मंडल से उखीमठ तक लगभग 113 किलोमीटर की बेहद कठिन और उच्च हिमालयी यात्रा पूरी की।
- प्रतिभागी: इस 113 किमी लंबी अल्ट्रा मैराथन में भारतीय सेना के 100 जांबाज़ जवानों और देशभर से आए लगभग 200 साहसिक ट्रैकर्स (कुल 300 प्रतिभागी) ने हिस्सा लिया।
- पुरस्कार राशि: विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विजेताओं के लिए 14 लाख रुपये से अधिक की पुरस्कार राशि रखी गई थी।
मुख्यमंत्री का संबोधन: युवाओं और सेना की सराहना
मुख्यमंत्री धामी ने स्वामी मनमथन सभागार में आयोजित समारोह में विजेताओं को सम्मानित किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा:
- राष्ट्र निर्माण में सेना की भूमिका: सेना सीमाओं की रक्षा के साथ-साथ ऐसे आयोजनों के जरिए युवाओं को प्रेरित कर राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।
- साहसिक पर्यटन को बढ़ावा: राज्य सरकार एंग्लिंग, राफ्टिंग और माउंटेनियरिंग जैसे साहसिक खेलों को योजनाबद्ध तरीके से विकसित कर रही है ताकि उत्तराखंड को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान मिले।
- वाइब्रेंट विलेज पहल: यह आयोजन ‘वाइब्रेंट विलेज’ योजना के तहत सीमावर्ती गांवों में रोजगार और पर्यटन के नए अवसर पैदा करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति
इस अवसर पर ओलंपिक पदक विजेता मुक्केबाज विजेंद्र सिंह, मध्य कमान के जीओसी-इन-सी लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता, गढ़वाल विवि की कुलपति प्रोफेसर अन्नपूर्णा नौटियाल और कई सैन्य व प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।