उत्तराखंड सरकार राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए पशुपालन को “आर्थिकी की रीढ़” के रूप में विकसित कर रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश को एक प्रमुख पशुपालन केंद्र बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।
देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घोषणा की है कि उत्तराखंड की ग्रामीण प्रगति का रास्ता पशुपालन से होकर गुजरता है। बजट 2026-27 में पशुपालन योजनाओं के लिए ₹42.02 करोड़ का आवंटन किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य दूध उत्पादन बढ़ाना और गांवों में रोजगार के नए अवसर पैदा करना है।
मुख्य सरकारी पहल और योजनाएं:
उत्तराखंड को पशुपालन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एग्रीकल्चर लीडरशिप अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है। मुख्यमंत्री का मानना है कि इन प्रयासों से न केवल किसानों की आय दोगुनी होगी, बल्कि उत्तराखंड “पशुपालन प्रदेश” के रूप में अपनी नई पहचान बनाएगा।
यहाँ मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना और पशुपालकों के लिए उपलब्ध बीमा योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई है, जो उत्तराखंड में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं:
त्तराखंड सरकार ने राज्य की दुर्गम पहाड़ियों में रहने वाली महिलाओं के सिर से घास का बोझ कम करने और पशुओं के लिए पौष्टिक आहार सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना (CM Ghyasari Kalyan Yojana) को प्रमुखता से लागू किया है। इसके साथ ही, पशुधन की सुरक्षा के लिए व्यापक पशु बीमा कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं।
1. मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना (CM Ghyasari Kalyan Yojana)
पहाड़ी क्षेत्रों में महिलाओं को चारे के लिए मीलों पैदल चलना पड़ता है, जिससे न केवल समय की बर्बादी होती है बल्कि जंगली जानवरों का खतरा भी बना रहता है।
  • सस्ता चारा (साइलेज): इस योजना के तहत सरकार पशुपालकों को मात्र ₹2 प्रति किलो की दर से पौष्टिक ‘साइलेज’ (मक्का आधारित हरा चारा) उपलब्ध करा रही है। बाजार में इसकी कीमत ₹10-12 प्रति किलो तक होती है।
  • किट वितरण: योजना के अंतर्गत महिलाओं को घस्यारी किट भी दी जाती है, जिसमें कुदाल, दरांती, पानी की बोतल और टिफिन जैसी आवश्यक वस्तुएं शामिल हैं।
  • उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य महिलाओं के शारीरिक कष्ट को कम करना और दुग्ध उत्पादन में वृद्धि करना है।
2. पशु बीमा योजना (Livestock Insurance Scheme)
पशुपालकों को अचानक होने वाले आर्थिक नुकसान से बचाने के लिए सरकार ने बीमा योजनाओं को बेहद सरल और सुलभ बनाया है:
  • प्रीमियम पर भारी सब्सिडी: इस योजना के तहत BPL, SC और ST वर्ग के पशुपालकों को बीमा प्रीमियम का केवल 10% भुगतान करना पड़ता है, जबकि शेष 90% खर्च केंद्र और राज्य सरकार वहन करती है। सामान्य श्रेणी के लिए यह अनुदान 75% तक है।
  • बीमा कवर: गाय, भैंस, भेड़ और बकरी जैसे सभी दुधारू और कृषि कार्यों में उपयोग होने वाले पशुओं का बीमा किया जाता है। यदि बीमारी या दुर्घटना में पशु की मृत्यु होती है, तो पशुपालक को उसकी बाजार कीमत के बराबर मुआवजा मिलता है।
  • हेल्पलाइन सुविधा: बीमा दावों और अन्य सहायता के लिए पशुपालक टोल-फ्री नंबर 1962 पर कॉल कर सकते हैं।
सरकारी प्रयास और भविष्य:
सहकारिता और पशुपालन विभाग के माध्यम से सरकार अब इन योजनाओं को डिजिटल बना रही है ताकि सब्सिडी सीधे लाभार्थी के खाते (DBT) में पहुँचे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में निर्देश दिए हैं कि इन योजनाओं का लाभ हर गाँव के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचना चाहिए।

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