हरिद्वार/देहरादून: उत्तराखंड के हरिद्वार वन प्रभाग के अंतर्गत श्यामपुर रेंज में दो बाघों (नर और मादा) के सनसनीखेज शिकार मामले में वन विभाग और एंटी-पोचिंग सेल को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार और गुरुवार की दरम्यानी रात लगातार दी गई दबिश के बाद वन विभाग ने फरार चल रहे आरोपियों में से दो और शिकारियों को गिरफ्तार कर लिया है।
पकड़े गए आरोपियों की पहचान आशिक पुत्र गामा और जुप्पी पुत्र अल्लू के रूप में हुई है, जो श्यामपुर की स्थानीय गुज्जर बस्ती के रहने वाले हैं. इसके अलावा, तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर इस गिरोह के एक अन्य सहयोगी यूसुफ पुत्र कालू निवासी गैंडीखाता को भी दबोचा गया है. इस मामले में पहले दिन ही मुख्य अभियुक्त आलम उर्फ फम्मी को गिरफ्तार किया जा चुका था. अब तक इस जघन्य वन्यजीव अपराध में कुल 4 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, जबकि मुख्य साजिशकर्ता आमिर हमजा उर्फ मियां अभी भी फरार है, जिसकी तलाश में 4 विशेष टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं.
क्या था मामला: बदला लेने के लिए दिया जहर
खबर के अनुसार, यह पूरा मामला हरिद्वार वन प्रभाग की श्यामपुर रेंज के अंतर्गत सजनपुर बीट (कंपार्टमेंट संख्या-09) का है, जहां सोमवार को वन विभाग की रूटीन गश्त के दौरान लगभग दो वर्ष की उम्र के एक नर और एक मादा बाघ के क्षत-विक्षत शव मिले थे.
- भैंस के मांस में मिलाया कीटनाशक: शुरुआती फॉरेंसिक जांच और आरोपियों से पूछताछ में पता चला है कि 15 मई को एक बाघिन ने आरोपियों की एक भैंस का शिकार किया था.
- बदले की घिनौनी साजिश: बाघों से बदला लेने और उनके बेशकीमती अंगों की तस्करी करने की नीयत से आरोपियों ने मरी हुई भैंस के शव पर कृषि कार्य में उपयोग होने वाला अत्यंत घातक जहरीला कीटनाशक छिड़क दिया.
- पंजों को काटकर किया गायब: जब दोनों युवा बाघ (जो आपस में भाई-बहन बताए जा रहे हैं) उस जहरीले मांस को खाने पहुंचे, तो मौके पर ही तड़प-तड़प कर उनकी मौत हो गई. इसके बाद शिकारियों ने अंतरराष्ट्रीय ब्लैक मार्केट में बेचने के उद्देश्य से दोनों बाघों के चारों पैर (पंजे) बेरहमी से काट दिए और फरार हो गए.
अंगों को दिल्ली में बेचने की थी तैयारी
रिपोर्ट के मुताबिक, वन विभाग की त्वरित कार्रवाई की वजह से बाघों की खाल और दांत तो बच गए, लेकिन कटे हुए पंजे गायब हैं. पूछताछ में खुलासा हुआ है कि आरोपी इन अंगों को दिल्ली के बड़े वन्यजीव तस्करों को सप्लाई करने की फिराक में थे. गायब पंजों और हड्डियों की बरामदगी के लिए वन विभाग ने कॉर्बेट टाइगर रिजर्व (CTR) से विशेष रूप से प्रशिक्षित स्निफर डॉग (Sniffer Dog) की मदद ली है, जो घने जंगलों में सबूत तलाश रहा है.
2017 की वन्यजीव तस्करी से जुड़े तार
डीएफओ (DFO) हरिद्वार स्वप्निल अनिरुद्ध ने बताया कि मामले की गहराई से जांच करने पर पता चला है कि फरार मुख्य आरोपी आमिर हमजा और गिरफ्तार यूसुफ का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है. वर्ष 2017 में भी इन्हें बाघ की हड्डियों और तेंदुए की खाल की तस्करी के मामले में नामजद किया गया था. इससे यह साफ होता है कि यह क्षेत्र में सक्रिय एक संगठित अंतरराज्यीय पोचिंग सिंडिकेट (Poaching Syndicate) का हिस्सा हैं, जो लंबे समय से काम कर रहा था.
लापरवाही पर रेंजर और फॉरेस्टर को नोटिस; NTCA करेगी जांच
इतने बड़े पैमाने पर देश के राष्ट्रीय पशु के शिकार की घटना से देहरादून से लेकर दिल्ली तक हड़कंप मच गया है.
- विभागीय कार्रवाई: मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रभागीय वनाधिकारी ने स्थानीय गश्त में भारी लापरवाही बरतने के आरोप में संबंधित वन क्षेत्राधिकारी (Ranger), वन दरोगा (Forester) और फॉरेस्ट गार्ड को कारण बताओ नोटिस जारी कर तत्काल स्पष्टीकरण मांगा है.
- केंद्रीय टीम का दौरा: इस गंभीर शिकार कांड की स्वतंत्र रूप से जांच करने और उत्तराखंड में बाघों की सुरक्षा का जायजा लेने के लिए नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) की एक उच्च स्तरीय केंद्रीय टीम भी जल्द ही हरिद्वार का मौका मुआयना करने पहुंच रही है. उत्तराखंड के वन मंत्री सुबोध उनियाल ने साफ कर दिया है कि किसी भी दोषी अधिकारी या शिकारी को बख्शा नहीं जाएगा.