नई दिल्ली/देहरादून: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को आज, 25 मई 2026 को देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्म भूषण से नवाजा जाएगा. नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन के ऐतिहासिक दरबार हॉल में आयोजित भव्य नागरिक सम्मान समारोह (Civil Investiture Ceremony) के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु उन्हें यह सम्मान प्रदान करेंगी.
इस विशेष गरिमामयी समारोह में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित कई कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहेंगे. राष्ट्रपति मुर्मु आज पहले चरण में कुल 66 हस्तियों को पद्म पुरस्कारों से सम्मानित कर रही हैं, जिनमें 2 पद्म विभूषण, 6 पद्म भूषण और 58 पद्म श्री शामिल हैं. इसी सूची में उत्तराखंड की राजनीति के दिग्गज ‘भगत दा’ का नाम भी शामिल है.
- कठिन परिस्थितियों में बचपन: भगत सिंह कोश्यारी का जन्म 17 जून 1942 को उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के एक सुदूर पर्वतीय गाँव पलानधुरा (चेताबगड़) में हुआ था. एक साधारण किसान परिवार में जन्मे कोश्यारी का शुरुआती जीवन बेहद तंगी और संघर्षों में बीता.
- लंबा शैक्षिक संघर्ष: उन्होंने प्राथमिक शिक्षा महरगाड़ से ली और जूनियर हाईस्कूल के लिए प्रतिदिन 8 किलोमीटर दूर शामा जाना पड़ता था. इसके बाद कपकोट से हाईस्कूल और पिथौरागढ़ से इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की. तमाम कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने अल्मोड़ा कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य में एम.ए. (MA) की डिग्री हासिल की.
- लेक्चरर की नौकरी और समाज सेवा: शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश के एटा जिले (राजा का रामपुर) में बतौर व्याख्याता (लेक्चरर) अपने करियर की शुरुआत की. लेकिन राष्ट्र सेवा की भावना के कारण उन्होंने नौकरी छोड़कर खुद को पूरी तरह संघ और समाज के लिए समर्पित कर दिया. उन्होंने उत्तराखंड के दूरदराज के क्षेत्रों में सरस्वती शिशु मंदिर जैसी शैक्षणिक संस्थाओं की स्थापना में मुख्य भूमिका निभाई.
- आपातकाल में जेल यात्रा: साल 1975 में देश में आपातकाल लागू होने के दौरान उन्होंने मुखर विरोध किया, जिसके कारण उन्हें ‘मीसा’ (MISA) के तहत गिरफ्तार किया गया और वे करीब दो साल तक फतेहगढ़ सेंट्रल जेल में बंद रहे.
- राजनीतिक करियर के मुख्य पड़ाव:
- वे उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य रहे.
- उत्तराखंड राज्य बनने के बाद वर्ष 2000 में वे अंतरिम सरकार में ऊर्जा व सिंचाई मंत्री बने.
- वर्ष 2001 से 2002 तक वे उत्तराखंड के दूसरे मुख्यमंत्री बने.
- 2002 से 2007 तक उत्तराखंड विधानसभा में विपक्ष के नेता रहे.
- वे राज्यसभा और लोकसभा दोनों सदनों के सांसद भी निर्वाचित हुए. सांसद रहते हुए उन्होंने ‘वन रैंक वन पेंशन’ (OROP) की संसदीय समिति की अध्यक्षता की थी.
- सितंबर 2019 से फरवरी 2023 तक उन्होंने महाराष्ट्र के 22वें राज्यपाल के रूप में कार्यभार संभाला.
महाराष्ट्र के कार्यकाल पर विवाद और आलोचना
पद्म भूषण की घोषणा के बाद जहां उनके समर्थकों में भारी उत्साह है, वहीं महाराष्ट्र की राजनीति में इस पर कुछ विवाद भी देखने को मिला. महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में उनका कार्यकाल (2019-2023) काफी चर्चा और विवादों में रहा था, विशेषकर महा विकास अघाड़ी (MVA) सरकार के साथ उनके टकराव और कुछ बयानों को लेकर. इसके चलते कांग्रेस और उद्धव ठाकरे गुट के कुछ नेताओं ने उन्हें यह सम्मान दिए जाने की आलोचना भी की थी.
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कोश्यारी ने साफ कहा कि वे किसी प्रशंसा या निंदा के लिए कार्य नहीं करते हैं. वे एक निष्काम कर्मयोगी और संघ के स्वयंसेवक हैं, जिनके लिए भारत माता की सेवा ही सर्वोपरि है. आज का यह सम्मान उनके इसी लंबे सार्वजनिक जीवन और राष्ट्र निष्ठा की परंपरा को केंद्र सरकार द्वारा दिया गया एक सर्वोच्च प्रामाणिक आदर है.