मसूरी/देहरादून: उत्तराखंड के प्रसिद्ध हिल स्टेशन मसूरी (Mussoorie) के प्रसिद्ध कैमल बैक रोड (Camel’s Back Road) क्षेत्र से सटे जंगलों में रविवार, 24 मई 2026 की देर शाम अचानक भीषण आग लग गई. देखते ही देखते इस वनाग्नि ने बेहद विकराल रूप धारण कर लिया, जिससे आसमान में घने काले धुएं का गुबार छा गया. आग की लपटें इतनी तेज और ऊंची थीं कि दूर-दूर से इन्हें साफ देखा जा सकता था. रिहायशी इलाकों और होटलों के नजदीक तक आग की लपटें पहुंचने से स्थानीय निवासियों और यहां घूमने आए पर्यटकों में भारी अफरा-तफरी और दहशत का माहौल बन गया. धुएं के कारण लोगों को सांस लेने में भारी तकलीफ और आंखों में जलन की समस्या का सामना करना पड़ा.
तेज हवाओं और ढलान के कारण आग ने लिया विकराल रूप
- देखते ही देखते फैली आग: स्थानीय चश्मदीदों के अनुसार, कैमल बैक रोड के नीचे खाई की तरफ मौजूद चीड़ के जंगलों में रविवार शाम को अचानक सुलगना शुरू हुआ. भीषण गर्मी और सूखी पत्तियों के कारण आग ने तेजी से रफ्तार पकड़ी.
- हवा के झोंकों ने बढ़ाई मुश्किल: पहाड़ों पर चल रही तेज हवाओं ने आग में घी का काम किया. कुछ ही घंटों के भीतर आग ने कई हेक्टेयर वन क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया.
- सांस लेना हुआ दूभर: पूरे मसूरी शहर के ऊपरी हिस्सों में धुएं की चादर बिछ गई. होटल में ठहरे पर्यटकों और घरों में मौजूद बच्चों-बुजुर्गों को सांस लेने में दिक्कत होने लगी, जिसके चलते कई लोग दहशत में घरों से बाहर निकल आए.
- वन संपदा और वन्यजीवों को भारी नुकसान: इस भीषण आग के कारण चीड़ के कीमती पेड़ और अन्य वन संपदा जलकर खाक हो गई. आग की चपेट में आने से कई छोटे जंगली जानवरों और पक्षियों के घोंसले नष्ट होने की आशंका जताई जा रही है.
आग बुझाने में खड़ी हुई भौगोलिक चुनौतियाँ
घटना की जानकारी मिलते ही मसूरी वन विभाग और फायर ब्रिगेड की गाड़ियां (फायर टेंडर) तुरंत मौके के लिए रवाना की गईं. हालांकि, पहाड़ी और गहरी खाई वाला क्षेत्र होने के कारण दमकल की गाड़ियों को सीधे घटना स्थल तक पहुंचने में भारी बाधाओं का सामना करना पड़ा. इसके बाद वन कर्मियों, फायर फाइटर्स और स्थानीय युवाओं की टीमों ने पैदल ही मौके पर पहुंचकर पारंपरिक तरीकों (हरी झाड़ियों और रैकों) और फायर फाइटिंग उपकरणों की मदद से आग की दिशा बदलने और उसे रोकने का प्रयास शुरू किया. देर रात तक टीमें मोर्चा संभाले हुए थीं.
असामाजिक तत्वों पर आग लगाने का संदेह: प्रशासन सख्त
रिपोर्ट के अनुसार, वन विभाग के अधिकारियों ने आशंका जताई है कि कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा जंगलों में जानबूझकर आग लगाई गई हो सकती है. इसके अलावा, गर्मियों के मौसम में पर्यटकों या स्थानीय लोगों द्वारा जंगलों के आसपास जलती हुई बीड़ी-सिगरेट फेंक देना भी ऐसी घटनाओं का एक बड़ा कारण बनता है