देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में अपनी मांगों को लेकर अड़े जूनियर हाईस्कूल शिक्षकों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। प्रादेशिक जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के बैनर तले प्रदेशभर से आए सैकड़ों शिक्षक पदाधिकारियों ने देहरादून स्थित प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय (ननूरखेड़ा) परिसर में एक दिवसीय विशाल धरना-प्रदर्शन किया। 1 मई से लगातार चरणबद्ध तरीके से अपनी 13 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे शिक्षकों ने अब सरकार के खिलाफ सीधे तौर पर मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को हुए इस प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने शिक्षा विभाग और राज्य सरकार की उदासीनता के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। संगठन के शीर्ष नेतृत्व ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी जायज मांगों पर तुरंत कोई ठोस और सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो आगामी 8 जून को राज्यभर के शिक्षक देहरादून में एकत्रित होकर सचिवालय का घेराव (सचिवालय कूच) करेंगे। 
मुख्य बिंदु
  • आंदोलन का मुख्य केंद्र: देहरादून स्थित प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय में प्रदेश स्तरीय धरना।
  • व्यापक सहभागिता: उत्तराखंड के सभी 13 जिलों के प्रत्येक विकासखंड से शिक्षक और संघ के पदाधिकारी देहरादून पहुंचे।
  • लंबे समय से संघर्ष: शिक्षक पिछले एक महीने (1 मई) से लगातार काली पट्टी बांधकर और रैलियां निकालकर विरोध दर्ज करा रहे हैं।
  • अगला बड़ा कदम: मांगों का समाधान न होने पर 8 जून को सचिवालय कूच करने का अल्टीमेटम। 

विस्तार से पूरी खबर 
प्रदेशभर के शिक्षकों का देहरादून में हुंकार
 रिपोर्ट के अनुसार, प्रादेशिक जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विनोद थापा के नेतृत्व में राज्य के कोने-कोने से शिक्षक देहरादून पहुंचे। सुबह से ही शिक्षा निदेशालय परिसर में शिक्षकों का जमावड़ा शुरू हो गया था। शिक्षकों का कहना है कि वे लंबे समय से शांतिपूर्ण ढंग से अपनी आवाज उठा रहे हैं, लेकिन शासन और प्रशासन के स्तर पर केवल आश्वासन ही मिल रहा है। पूर्व में कई दौर की वार्ताएं बेनतीजा रहने के कारण शिक्षकों में गहरा असंतोष है, जिसके चलते उन्हें सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा है। 
ये हैं शिक्षकों की प्रमुख 13 सूत्रीय मांगें (Key Demands) 
शिक्षकों ने मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है, जिसमें निम्नलिखित मुख्य मांगें शामिल हैं: 
  1. टीईटी (TET) की अनिवार्यता से मुक्ति: शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE 2009) लागू होने से पूर्व सेवा में आ चुके शिक्षकों को पदोन्नति के लिए टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की बाध्यता से पूरी तरह मुक्त रखा जाए। 
  2. त्रिस्तरीय कैडर व्यवस्था: जूनियर हाईस्कूलों का पृथक संचालन करते हुए बेसिक शिक्षकों को पीआरटी (PRT), टीजीटी (TGT) और पीजीटी (PGT) श्रेणी के तहत त्रिस्तरीय ढांचे में पदोन्नति दी जाए। 
  3. वेतनमान विसंगति और रिकवरी पर रोक: 17,140 रुपये के प्रारंभिक वेतनमान का लाभ दिए जाने के बाद विभाग द्वारा की जा रही वसूली (रिकवरी) की कार्रवाई को तुरंत निरस्त कर स्पष्ट आदेश जारी किए जाएं। 
  4. पदोन्नति (Promotions): प्राथमिक और जूनियर स्तर के शिक्षकों के लिए उनके पूरे सेवाकाल के दौरान कम से कम तीन समयबद्ध पदोन्नतियां सुनिश्चित की जाएं। 
  5. पारदर्शी स्थानांतरण नीति: अंतर्जनपदीय स्थानांतरण (Inter-district transfers) की पारदर्शी एवं सुगम व्यवस्था लागू की जाए। 
  6. पुरानी पेंशन योजना (OPS): राज्य के सभी शिक्षकों के लिए पुरानी पेंशन योजना को बहाल किया जाए। 
चरणबद्ध आंदोलन और भविष्य की रणनीति
जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के जिला और ब्लॉक स्तर के पदाधिकारियों ने बताया कि उनका यह आंदोलन अचानक शुरू नहीं हुआ है। उन्होंने एक मई से दस मई तक स्कूलों में काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य किया और सरकार को जगाने का प्रयास किया। इसके बाद जिला मुख्यालयों (जैसे नई टिहरी और देहरादून) पर कलेक्ट्रेट तक आक्रोश रैलियां निकाली गईं। संघ के नेताओं ने दो-टूक शब्दों में कहा कि यदि 8 जून से पहले उत्तराखंड सरकार ने कैबिनेट या शासनादेश के माध्यम से उनकी मांगों पर मुहर नहीं लगाई, तो सचिवालय कूच के बाद पूरे प्रदेश में शिक्षण कार्य ठप (चाक-डाउन हड़ताल) करने पर भी विचार किया जा सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शिक्षा विभाग की होगी।

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