देहरादून: उत्तराखंड राज्य में पिछले डेढ़ दशक (लगभग 15 वर्षों) में बहुत बड़ा जनसांख्यिकीय और सामाजिक बदलाव देखने को मिला है. जनगणना निदेशालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों और हाल ही में संपन्न हुई भवन गणना के अनुसार, राज्य की जनसंख्या में 26 प्रतिशत और परिवारों की संख्या में 40 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इसके साथ ही राज्य में मकानों की कुल संख्या में भी 33 प्रतिशत का जबरदस्त उछाल आया है. इन आंकड़ों के सामने आने के बाद निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची को पूरी तरह शुद्ध करने के लिए SIR (Special Intensive Revision) अभियान के तहत तैयारियां तेज कर दी हैं.
आंकड़ों का पूरा गणित: 2011 बनाम वर्तमान स्थिति
  • जनसंख्या में 26% की वृद्धि: साल 2011 की आधिकारिक जनगणना के अनुसार, उत्तराखंड की कुल आबादी लगभग 1.01 करोड़ थी. वर्तमान आंकड़ों के मुताबिक अब राज्य की कुल जनसंख्या बढ़कर 1.27 करोड़ के पार पहुंच चुकी है.
  • परिवारों की संख्या में 40% का उछाल: वर्ष 2011 में राज्य के भीतर करीब 20 लाख परिवार निवास करते थे. एकल परिवारों (Nuclear Families) के बढ़ते चलन और प्रवासन के चलते अब परिवारों की संख्या बढ़कर 28.3 लाख हो गई है.
  • रियल एस्टेट और मकानों में 33% की बढ़ोतरी: साल 2011 में उत्तराखंड में कुल मकानों की संख्या लगभग 33.8 लाख थी. पिछले 15 वर्षों में रियल एस्टेट सेक्टर में आए उछाल और नए निर्माणों के कारण अब मकानों की संख्या बढ़कर 45 लाख हो गई है. इसका मतलब है कि इस अवधि में राज्य में 11.2 लाख नए घर बने हैं. 

क्यों बढ़े इतने परिवार और मकान? मुख्य कारण
  1. एकल परिवारों का बढ़ता चलन: समाजशास्त्रियों और विशेषज्ञों के अनुसार, अब संयुक्त परिवारों के टूटने और शहरों में एकल परिवारों (पति, पत्नी और बच्चे) के रूप में रहने की प्रवृत्ति बहुत तेजी से बढ़ी है. यही कारण है कि जनसंख्या के मुकाबले परिवारों की संख्या में ज्यादा तेजी से (40%) वृद्धि हुई है.
  2. पहाड़ों से मैदानों की तरफ प्रवासन (Migration): उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों से रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए लोगों का देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जैसे मैदानी जिलों में प्रवासन हुआ है. मैदानी इलाकों में आकर लोगों ने नए घर बसाए हैं, जिससे मकानों और परिवारों की संख्या बढ़ी है.
  3. बाहरी राज्यों से आकर बसने वाले लोग: राज्य के औद्योगिक क्षेत्रों (जैसे पंतनगर, सिडकुल हरिद्वार, सेलाकुई) के विकास के बाद उत्तर प्रदेश, बिहार और अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में लोग आकर यहां स्थायी रूप से बस गए हैं, जिससे भवनों और जनसंख्या का ग्राफ ऊपर गया है. 

अब ‘SIR’ से होगी वोटर लिस्ट की सफाई 
जनगणना निदेशालय और भवन गणना के इन चौंकाने वाले आंकड़ों के बाद मुख्य निर्वाचन आयुक्त के निर्देश पर राज्य में वोटर लिस्ट के शुद्धिकरण की तैयारी शुरू हो गई है. इसके लिए SIR (Special Intensive Revision) तकनीक का सहारा लिया जा रहा है. 
  • प्री-एसआईआर (Pre-SIR) फेज में 89% मैपिंग पूरी: अधिकारियों के अनुसार, इस महाभियान के पहले चरण यानी प्री-एसआईआर फेज में राज्य के 89 प्रतिशत हिस्से की मैपिंग का काम सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है.
  • अधिकारियों की ट्रेनिंग संपन्न: राज्य के सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO), डिप्टी डीईओ और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ERO) के पहले चरण का प्रशिक्षण (Training) पूरा कर लिया गया है. अब गणना प्रपत्रों (Enumeration Forms) की प्रिंटिंग का काम चल रहा है.
  • फर्जी और दोहरी प्रविष्टियां होंगी बाहर: इस सघन अभियान का मुख्य उद्देश्य ऐसे मतदाताओं को चिन्हित करना है जो या तो मृत हो चुके हैं, कहीं और शिफ्ट हो चुके हैं, जिनका नाम दो अलग-अलग विधानसभाओं या राज्यों में दर्ज है, या जो अवैध रूप से रह रहे हैं. इससे उत्तराखंड की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जा सकेगा.

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