वाशिंगटन/तेहरान: मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में चल रहा युद्ध विराम (Ceasefire) एक बार फिर पूरी तरह खत्म होने की कगार पर पहुंच गया है। ईरान ने अमेरिका के साथ चल रही शांति वार्ता को बीच में ही रोक दिया है और चेतावनी दी है कि यदि लेबनान पर इजरायली हमले तुरंत नहीं रुके, तो दोनों देशों के बीच हुआ अस्थाई सीजफायर आधिकारिक रूप से समाप्त हो जाएगा। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची ने स्पष्ट किया कि सीजफायर सभी मोर्चों के लिए था, और किसी भी एक मोर्चे पर हमला पूरे समझौते का उल्लंघन माना जाएगा।
ईरान द्वारा वार्ता रोकने की मुख्य वजहें
- इजरायल द्वारा दक्षिणी बेरूत और लेबनान के रिहायशी इलाकों पर लगातार हवाई हमले किए जा रहे हैं।
- ईरानी सेना (IRGC) का आरोप है कि अमेरिका और इजरायल मिलकर सीजफायर के नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं।
- ईरान ने इजरायल के उत्तरी क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को तुरंत घर खाली करने की सख्त चेतावनी जारी कर दी है।
- तेहरान का मानना है कि लेबनान में इजरायली जमीनी सेना का आगे बढ़ना उनके लिए सीधे तौर पर एक रेड लाइन (Red Line) पार करना है।
- इसके विरोध में ईरान ने कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता से चल रही बैक-चैनल शांति वार्ताओं को अनिश्चितकाल के लिए सस्पेंड कर दिया है।
बढ़ते सैन्य हमले और जवाबी कार्रवाई
- सीजफायर की शर्तों के डगमगाते ही ईरान ने एक बार फिर अपनी बैलिस्टिक मिसाइलों के परीक्षण और तैनाती का वीडियो जारी किया है।
- कुवैत और बहरीन जैसे पड़ोसी देशों ने अपनी हवाई सीमाओं में ईरान की तरफ से दागे गए ड्रोन और मिसाइलों को इंटरसेप्ट करने का दावा किया है。
- अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (Pentagon) के अनुसार, कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर दागी गईं दो ईरानी मिसाइलों को मार गिराया गया है।
- दूसरी तरफ, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सेना को बेरूत में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमले तेज करने के आदेश दिए हैं।
- इजरायल का कहना है कि ईरान के साथ हुआ सीजफायर लेबनान या हिजबुल्लाह के खिलाफ उनके सैन्य अभियानों को नहीं रोक सकता।
डोनाल्ड ट्रंप का दखल और कूटनीतिक प्रयास
- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उन्होंने स्थिति को संभालने के लिए इजरायली पीएम नेतन्याहू और हिजबुल्लाह के प्रतिनिधियों से सीधी बात की है।
- ट्रंप के मुताबिक, नेतन्याहू बेरूत में एक बड़े सैन्य ऑपरेशन को टालने पर सहमत हुए हैं, बशर्ते हिजबुल्लाह भी गोलाबारी रोके।
- व्हाइट हाउस अभी भी दोनों देशों को वाशिंगटन में लाकर 60 दिनों के एक परमानेंट शांति समझौते पर हस्ताक्षर कराने का प्रयास कर रहा है।
- इस प्रस्तावित डील में होर्मुज जलडमरू मध्य (Strait of Hormuz) को वैश्विक तेल व्यापार के लिए दोबारा पूरी तरह खोलने की शर्त शामिल है।
- हालांकि, ईरान के अड़ियल रुख और इजरायल की आक्रामक नीति के कारण इस समझौते का भविष्य पूरी तरह अधर में लटका नजर आ रहा है।