विकासनगर/देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कड़े निर्देशों के बाद राज्यभर में सरकारी भूमि से अवैध अतिक्रमण हटाने का अभियान और तेज हो गया है। इसी कड़ी में देहरादून जिले की विकासनगर तहसील के अंतर्गत आने वाले शीशमबाड़ा क्षेत्र (शिमला बाईपास) में प्रशासन ने बड़ी बुलडोजर कार्रवाई की है। राजस्व विभाग और स्थानीय जिला प्रशासन की संयुक्त टीम ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में सरकारी जमीन पर अवैध रूप से निर्मित एक मजार और उसके आसपास किए गए अन्य अस्थायी निर्माणों को पूरी तरह से नेस्तनाबूद कर दिया है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई पूरी कानूनी प्रक्रिया और नियमानुसार पूर्व में नोटिस जारी करने की समय-सीमा समाप्त होने के बाद ही अमल में लाई गई है। 
स्थानीय लोगों की शिकायत के बाद हुई प्रशासनिक जांच 
  • शीशमबाड़ा क्षेत्र में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे और मजार संचालन को लेकर स्थानीय निवासियों द्वारा लगातार शिकायतें दर्ज कराई जा रही थीं।
  • जनशिकायतों का संज्ञान लेते हुए देहरादून के जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने राजस्व विभाग को मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए थे।
  • राजस्व विभाग की तकनीकी टीम ने मौके पर पहुंचकर जब भूमि की पैमाइश की, तो सच सामने आ गया।
  • प्रशासनिक व राजस्व जांच में संबंधित भूमि पूरी तरह से सरकारी अभिलेखों (राजस्व रिकॉर्ड) में सरकारी संपत्ति के रूप में दर्ज पाई गई।
  • जांच रिपोर्ट में यह पूरी तरह साफ हो गया कि उक्त भूमि पर बिना किसी अनुमति के अवैध रूप से मजार का निर्माण कर उसका संचालन किया जा रहा था। 
कानूनी प्रक्रिया के तहत दो हफ्ते पहले दिया गया था नोटिस 
  •  रिपोर्ट के अनुसार, अवैध पाए जाने के तुरंत बाद प्रशासन ने सीधे कार्रवाई करने के बजाय पूरी विधिक प्रक्रिया का पालन किया।
  • करीब दो सप्ताह पहले अतिक्रमणकारी और संबंधित पक्ष को बेदखली का आधिकारिक नोटिस जारी कर वहां चस्पा किया गया था।
  • नोटिस के माध्यम से कब्जाधारकों को भूमि के मालिकाना हक या निर्माण से संबंधित वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने का पर्याप्त समय दिया गया था।
  • निर्धारित समयावधि बीत जाने के बाद भी संबंधित पक्ष की ओर से कोई भी वैध प्रशासनिक या कानूनी दस्तावेज पेश नहीं किया जा सका।
  • इसके उपरांत ही तहसील प्रशासन ने अवैध कब्जे को बलपूर्वक हटाने के लिए ध्वस्तीकरण की अंतिम रूपरेखा तैयार की। 
सुरक्षा घेरे के बीच महज एक घंटे में कार्रवाई पूरी
  • अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई के दौरान क्षेत्र में किसी भी तरह के विरोध या कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने की आशंका को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया था।
  • मंगलवार को तड़के ही राजस्व विभाग के अधिकारी, पुलिस उपाधीक्षक, थानाध्यक्ष और भारी संख्या में पुलिस के जवान पीला पंजा (बुलडोजर) लेकर मौके पर पहुंच गए।
  • कार्रवाई शुरू करने से पहले सुरक्षा के लिहाज से पूरे संवेदनशील इलाके को चारों तरफ से बैरिकेडिंग कर पूरी तरह सील कर दिया गया था।
  • इसके बाद प्रशासन के बुलडोजर ने अवैध मजार और वहां खड़े किए गए अन्य सभी कच्चे-पक्के अस्थायी ढांचों को गिराना शुरू किया।
  • प्रशासनिक मुस्तैदी और भारी पुलिस बल के दबाव के कारण मौके पर किसी भी प्रकार का कोई विरोध देखने को नहीं मिला और महज एक घंटे के भीतर पूरी कार्रवाई को बेहद शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कर लिया गया।
  • ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पूरी होने के तुरंत बाद नगर निगम और प्रशासन की टीमों ने मौके पर फैले मलबे को भी पूरी तरह साफ करवाकर जमीन को अपने नियंत्रण में ले लिया।
सरकारी भूमि जनता की संपत्ति, कब्जा बर्दाश्त नहीं: डीएम
  • कार्रवाई के बाद मीडिया से बात करते हुए जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने कहा कि सरकारी भूमि असल में जनता की संपत्ति है और इस पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
  • उन्होंने बताया कि देहरादून जिले की सभी तहसीलों में सरकारी जमीनों पर बने अवैध धार्मिक स्थलों और अन्य अतिक्रमणों को चिह्नित करने के लिए लगातार विस्तृत सर्वेक्षण कराया जा रहा है।
  • चिन्हित किए जा रहे ऐसे सभी अवैध निर्माणों और इंक्रोचमेंट साइट्स के खिलाफ आने वाले दिनों में भी इसी प्रकार चरणबद्ध तरीके से सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
  • डीएम ने सभी उपजिलाधिकारियों (SDMs) और तहसीलदारों को कड़े निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण करें ताकि सरकारी भूमि पर दोबारा कोई नया अतिक्रमण सिर न उठा सके।
  • इसके साथ ही जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि यदि उनके आसपास किसी भी सरकारी या वन भूमि पर अवैध कब्जा किया जा रहा हो, तो उसकी सूचना तुरंत प्रशासन को दें ताकि समय रहते त्वरित कार्रवाई की जा सके।

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