भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उत्तराखंड में आगामी राजनीतिक चुनौतियों और विधानसभा चुनाव 2027 को ध्यान में रखते हुए अपना विशेष ‘मिशन 2027’ शुरू कर दिया है। हाल ही में दिल्ली से लेकर देहरादून तक चली उच्च स्तरीय मैराथन बैठकों के बाद इस पूरी महा-रणनीति को अंतिम रूप दिया गया है। इस योजना के तहत राज्य के मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों, सभी लोकसभा व राज्यसभा सांसदों, प्रांतीय मंत्रियों और विधायकों के लिए अपनी या आवंटित विधानसभा सीटों पर 24 घंटे का समय बिताना अनिवार्य कर दिया गया है।
केंद्रीय नेतृत्व का कड़ा निर्देश
नई दिल्ली में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी में हुई संगठनात्मक बैठकों में यह स्पष्ट संदेश दिया गया है कि कोई भी जनप्रतिनिधि जमीन से दूर नहीं रह सकता। पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व ने निर्देश दिया है कि इस 24 घंटे के प्रवास के दौरान सभी नेताओं को केवल औपचारिक बैठकें ही नहीं करनी हैं, बल्कि स्थानीय जनता और कार्यकर्ताओं के बीच जाकर रात भी गुजारनी होगी। इस अनूठे प्रवास कार्यक्रम के माध्यम से भाजपा उत्तराखंड के सुदूर पर्वतीय क्षेत्रों से लेकर मैदानी इलाकों तक अपनी वैचारिक पकड़ और चुनावी समीकरणों को अभेद्य बनाना चाहती है।
प्रवास के दौरान क्या करेंगे जनप्रतिनिधि?
पार्टी द्वारा तैयार की गई विस्तृत गाइडलाइन के अनुसार, 24 घंटे के इस प्रवास के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
  • ग्रामीण संपर्क अभियान: नेताओं को गांवों का दौरा कर सीधे ग्रामीणों से संवाद स्थापित करना होगा।
  • कार्यकर्ताओं से संवाद: बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं (बूथ एजेंटों) और शक्ति केंद्र संयोजकों के साथ विशेष बैठकें होंगी।
  • बुद्धिजीवियों की सूची: हर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से कम से कम 100 स्थानीय बुद्धिजीवियों (शिक्षकों, डॉक्टरों, सेवानिवृत्त अधिकारियों) की सूची बनाकर उनसे व्यक्तिगत संपर्क साधा जाएगा।
  • विकास कार्यों का प्रचार: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के पिछले 12 वर्षों के ऐतिहासिक कार्यों और उपलब्धियों की बुकलेट घर-घर पहुंचाई जाएगी।
  • विधायकों का रिपोर्ट कार्ड: स्थानीय विधायकों को अपने कार्यकाल में किए गए विकास कार्यों का व्यक्तिगत ब्योरा भी जनता के समक्ष रखना होगा।
  • समस्याओं का तत्काल निवारण: जनता की स्थानीय समस्याओं और शिकायतों को दर्ज कर उनका त्वरित समाधान सुनिश्चित करना होगा।
समन्वय और चुनावी हैट्रिक पर जोर
देहरादून में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और वरिष्ठ पार्टी पदाधिकारियों की मौजूदगी में राष्ट्रीय नेताओं ने साफ किया कि उत्तराखंड में सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल ही जीत का मुख्य आधार बनेगा। हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में हुई कोर कमेटी की बैठक में भी कार्यकर्ताओं की संतुष्टि और मतदाता सूची संशोधन (SIR) प्रक्रिया को शत-प्रतिशत पूरा करने पर विशेष जोर दिया गया था।
भाजपा का मानना है कि इस सघन जनसंपर्क अभियान से न केवल सरकार विरोधी लहर (एंटी-इंकंबेंसी) को खत्म किया जा सकेगा, बल्कि उन सीटों पर भी मजबूत पकड़ बनाई जा सकेगी जहां पिछला प्रदर्शन कमजोर रहा था। 24 घंटे के इस अनिवार्य प्रवास कार्यक्रम की मॉनिटरिंग सीधे केंद्रीय संगठन द्वारा की जाएगी, जिसकी रिपोर्ट नियमित अंतराल पर दिल्ली भेजी जाएगी। इस रणनीति से उत्तराखंड की सियासत में भारी हलचल मच गई है और पार्टी पूरी तरह से चुनावी मोड में नजर आ रही है।

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