उत्तराखंड में भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों पर मतदाता सूची को पूरी तरह सटीक, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) महाअभियान की औपचारिक शुरुआत हो गई है. सोमवार को सचिवालय में मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पहला गणना फॉर्म (Enumeration Form) सौंपकर इस राज्यव्यापी शुद्धिकरण अभियान का आगाज किया. मुख्यमंत्री धामी ने अपना फॉर्म भरकर जमा करते हुए प्रदेशवासियों से इस लोकतंत्र को मजबूत करने वाले अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की. इसके साथ ही, राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) ने भी राजभवन में अपना गणना फॉर्म भरा. 
इस अभियान की शुरुआत पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक बड़ा राजनीतिक व प्रशासनिक बयान दिया है. सीएम धामी ने साफ तौर पर कहा कि इस SIR महाअभियान के जरिए राज्य की मतदाता सूचियों से सभी अपात्रों और घुसपैठियों के नाम पूरी तरह से हटा दिए जाएंगे

वोटर लिस्ट के शुद्धिकरण पर सीएम धामी का बड़ा बयान 
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में मीडिया से बात करते हुए कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की जनसांख्यिकी और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के तत्त्वाधान में हो रही यह SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी तरीके से संचालित की जा रही है. 
  • घुसपैठियों पर प्रहार: सीएम ने स्पष्ट किया कि जिन लोगों ने राज्य में संदिग्ध अवस्था में रहते हुए या अवैध तरीके से घुसपैठ कर वोटर लिस्ट में अपना नाम दर्ज करा लिया है, इस जांच के बाद उनके नाम काट दिए जाएंगे.
  • मृत व अपात्रों की छंटनी: ऐसे लोग जो अब इस दुनिया में नहीं हैं (मृतक) या जो स्थाई रूप से राज्य छोड़ चुके हैं, लेकिन उनके नाम अभी भी सूची में चल रहे हैं, उन्हें भी बाहर किया जाएगा. 
  • सटीक डेटा: इस शुद्धिकरण के बाद राज्य के पास केवल वैध और वास्तविक पात्र मतदाताओं का ही एक सही व सटीक आंकड़ा (Data) सामने निकलकर आएगा. 

क्या है ‘SIR’ महाअभियान और कैसे काम करेगा?
मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम ने इस महाअभियान की कार्ययोजना साझा करते हुए बताया कि इसका मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को शत-प्रतिशत शुद्ध बनाना है. 
  1. घर-घर जाएंगे बीएलओ (BLO): राज्य के सभी बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) आगामी 7 जुलाई तक एक महीने के भीतर प्रदेश के हर घर में व्यक्तिगत रूप से जाएंगे. 
  2. गणना प्रपत्र का वितरण: बीएलओ द्वारा प्रत्येक परिवार को एक गणना प्रपत्र (Enumeration Form) उपलब्ध कराया जाएगा, जिसमें परिवार के सभी योग्य सदस्यों की सही जानकारी दर्ज करनी होगी. [
  3. डिजिटलाइजेशन: फॉर्म भरे जाने के बाद बीएलओ द्वारा ‘बीएलओ ऐप’ (BLO App) के माध्यम से मौके पर ही सभी डेटा को तुरंत डिजिटल फॉर्मेट में अपलोड किया जाएगा. 
  4. पुरानी सूचियों से मिलान: इस अभियान के दौरान साल 2003 की पुरानी मतदाता सूची के रिकॉर्ड से वर्तमान नामों का भौतिक और तकनीकी मिलान किया जा रहा है. 

⚠️ नाम में गड़बड़ी मिली तो जारी होगा नोटिस 
 रिपोर्ट के अनुसार, इस बार का पुनरीक्षण अत्यंत कड़ा होने वाला है. यदि साल 2003 की पुरानी मतदाता सूची और वर्तमान विवरणों के बीच किसी मतदाता के नाम, उपनाम या पते में कोई बड़ी भिन्नता पाई जाती है, तो निर्वाचन विभाग द्वारा संबंधित व्यक्ति को आधिकारिक नोटिस जारी किया जाएगा. 
नोटिस मिलने के बाद संबंधित नागरिक को तय समय सीमा के भीतर अपनी वैध भारतीय पहचान और पते के आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत कर अपनी पात्रता साबित करनी होगी. यदि कोई व्यक्ति सही दस्तावेज पेश करने में विफल रहता है या उसकी पहचान संदिग्ध पाई जाती है, तो उसका नाम मतदाता सूची से स्थायी रूप से विलोपित (हटा) कर दिया जाएगा. 

🗺️ मैदानी जिलों और मैपिंग से छूटे क्षेत्रों पर विशेष नजर
निर्वाचन विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती राज्य के मैदानी जिलों, विशेषकर देहरादून, हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर में आ रही है, जहां पिछले वर्षों में जनसंख्या और आवासीय कॉलोनियों में तेजी से बदलाव आया है. 
  • 8.81 लाख मतदाताओं की तलाश: राज्य में लगभग 8.81 लाख मतदाता ऐसे चिह्नित किए गए हैं, जिनकी वर्तमान डिजिटल मैपिंग नहीं हो पाई है. बीएलओ को इन सभी मतदाताओं के भौतिक सत्यापन की विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है. 
  • सघन जांच: उत्तराखंड के सीमावर्ती और संवेदनशील इलाकों में इस पुनरीक्षण के दौरान प्रशासनिक अमला अधिक मुस्तैद रहेगा ताकि किसी भी बाहरी या अवैध नागरिक का नाम सूची में न जुड़ सके.
इस महाअभियान से जुड़ी आधिकारिक गाइडलाइंस, फॉर्म डाउनलोड करने की सुविधा और लाइव प्रोग्रेस रिपोर्ट देखने के लिए आप मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तराखंड (CEO Uttarakhand) के आधिकारिक वेब पोर्टल पर जा सकते हैं. 

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