उत्तराखंड की पवित्र धर्मनगरी हरिद्वार में खाद्य पदार्थों के नामकरण को लेकर एक नया सांस्कृतिक और धार्मिक विवाद खड़ा हो गया है. अखंड परशुराम अखाड़े के नेतृत्व में साधु-संतों और हिंदूवादी संगठनों ने शहर में बिकने वाली ‘वेज बिरयानी‘ (शाकाहारी बिरयानी) के नाम पर कड़ी आपत्ति जताई है. संतों का तर्क है कि ‘बिरयानी’ शब्द ऐतिहासिक और पारंपरिक रूप से मांसाहारी व्यंजनों से जुड़ा हुआ है, इसलिए हरिद्वार जैसी पवित्र नगरी में शाकाहारी चावल के व्यंजनों के लिए ‘वेज बिरयानी‘ की जगह ‘वेज पुलाव‘ शब्द का ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए. इसके विरोध में संतों ने सड़कों पर उतरकर एक विशेष अभियान चलाया और दर्जनों दुकानों व ठेलों पर लगे ‘वेज बिरयानी‘ के बोर्डों पर ‘वेज पुलाव’ के स्टिकर चस्पा कर दिए
क्या है पूरा विवाद और संतों का अभियान?
रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार और रविवार को हरिद्वार के विभिन्न क्षेत्रों में अखंड परशुराम अखाड़े के पदाधिकारियों ने फूड स्टॉल्स का औचक निरीक्षण किया. इस दौरान जिन भी ठेलों या रेस्तरां के बाहर ‘वेज बिरयानी‘ या ‘हैदराबादी वेज बिरयानी’ लिखा हुआ था, संतों ने उन बोर्डों और होर्डिंग्स को हटाने की मांग की.
संगठन के कार्यकर्ताओं ने अपने साथ ‘गंगा वेज पुलाव’ और ‘वेज पुलाव’ लिखे हुए विशेष पोस्टर और स्टिकर रखे हुए थे, जिन्हें दुकानदारों की सहमति से उनके साइनबोर्ड पर चिपका दिया गया. सोशल मीडिया पर इस घटना के कई वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिसमें साधु-संत ठेले वालों को समझाते और बोर्ड बदलते नजर आ रहे हैं.
धार्मिक मर्यादा और आगामी महाकुंभ का हवाला
अखंड परशुराम अखाड़े के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक और पंडित पवन कृष्ण शास्त्री ने इस मुहिम के पीछे के मुख्य कारणों को स्पष्ट किया है:
- सांस्कृतिक पहचान: संतों का कहना है कि बिरयानी मूल रूप से मांसाहारी खानपान की संस्कृति का हिस्सा माना जाता है. धर्मनगरी में इसका नाम बार-बार सामने आने से सनातन परंपराओं और पवित्रता पर विपरीत असर पड़ता है.
- भ्रम की स्थिति: पंडित अधीर कौशिक ने बताया कि संगठन को लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि कई दुकानदार सामान्य शाकाहारी पुलाव को ही ‘वेज बिरयानी’ के फैशनेबल नाम से बेच रहे हैं, जिससे श्रद्धालुओं में भ्रम पैदा होता है.
- आगामी बड़े धार्मिक मेले: हरिद्वार में जल्द ही वार्षिक कांवड़ मेला, माघ मेला और वर्ष 2027 का महाकुंभ आयोजित होने वाला है. इस दौरान देश-विदेश से करोड़ों हिंदू सनातनी श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए हरिद्वार आएंगे. ऐसे में शहर का वातावरण पूरी तरह सात्विक और पारंपरिक दिखना जरूरी है.
दुकानदारों और स्थानीय व्यापार मंडल की प्रतिक्रिया
इस अचानक चली मुहिम पर स्थानीय रेहड़ी-पटरी और छोटे दुकानदारों की मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आ रही है:
- सहयोग और बदलाव: कई छोटे ठेले वालों ने विवाद से बचने और संतों की अपील का सम्मान करते हुए तुरंत अपने बैनर बदल लिए हैं. एक दुकानदार ने बताया, “सामग्री और बनाने का तरीका वही सोया चंक्स और चावल वाला है, लेकिन संतों के कहने पर हमने बैनर पर नाम ‘वेज बिरयानी’ से बदलकर ‘वेज पुलाव’ कर दिया है.”
- व्यापारिक चिंताएं: दूसरी ओर, कुछ स्ट्रीट वेंडर्स एसोसिएशन और स्थानीय व्यापारियों का मानना है कि ‘वेज बिरयानी’ और ‘पुलाव’ दोनों अलग स्वाद वाले व्यंजन हैं और ग्राहक अपनी पसंद से इन्हें खरीदते हैं. उनका कहना है कि नाम बदलने से उनके व्यापार और बिक्री पर असर पड़ सकता है, तथा इस प्रकार की अनिवार्यताओं से छोटे दुकानदारों पर दबाव बढ़ता है.
अखाड़े के संतों ने साफ किया है कि उनका उद्देश्य किसी भी गरीब व्यापारी या दुकानदार के रोजगार को नुकसान पहुंचाना नहीं है, बल्कि वे केवल नाम में सुधार कराकर तीर्थनगरी की धार्मिक मर्यादा की रक्षा सुनिश्चित करना चाहते हैं. प्रशासन इस पूरे घटनाक्रम और कानून-व्यवस्था की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है.