राज्य ब्यूरो, देहरादून।
देवभूमि उत्तराखंड के राजनैतिक गलियारों में पिछले कई दिनों से चर्चा का विषय बने गदरपुर विधायक और पूर्व कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडेय से जुड़े विवादित प्रकरण का पटाक्षेप हो गया है। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक विवादित पत्र वायरल हुआ था, जिसे लेकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने राज्य सरकार को घेरने का प्रयास किया था। इस पूरे घटनाक्रम के बीच देहरादून के सत्ता गलियारों में डैमेज कंट्रोल और संगठनात्मक एकता को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ वरिष्ठ पार्टी नेताओं और पूर्व मुख्यमंत्री की महत्वपूर्ण मैराथन बैठकें आयोजित की गईं। विश्वसनीय मीडिया सूत्रों से प्राप्त जानकारी के आधार पर इस पूरे मामले का सिलसिलेवार ब्यौरा नीचे दिया गया है:
देवभूमि उत्तराखंड के राजनैतिक गलियारों में पिछले कई दिनों से चर्चा का विषय बने गदरपुर विधायक और पूर्व कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडेय से जुड़े विवादित प्रकरण का पटाक्षेप हो गया है। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक विवादित पत्र वायरल हुआ था, जिसे लेकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने राज्य सरकार को घेरने का प्रयास किया था। इस पूरे घटनाक्रम के बीच देहरादून के सत्ता गलियारों में डैमेज कंट्रोल और संगठनात्मक एकता को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ वरिष्ठ पार्टी नेताओं और पूर्व मुख्यमंत्री की महत्वपूर्ण मैराथन बैठकें आयोजित की गईं। विश्वसनीय मीडिया सूत्रों से प्राप्त जानकारी के आधार पर इस पूरे मामले का सिलसिलेवार ब्यौरा नीचे दिया गया है:
- मुलाकात और राजनैतिक मंथन: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और पौड़ी गढ़वाल से नवनिर्वाचित सांसद अनिल बलूनी के बीच देहरादून में एक अत्यंत महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय बैठक हुई।
- विवाद पर लगा पूर्ण विराम: इस सामूहिक बैठक और वरिष्ठ नेताओं के हस्तक्षेप के बाद विधायक अरविंद पांडेय प्रकरण को लेकर चल रहे सभी विवादों और कयासों पर पूरी तरह से विराम लग गया है।
- मिशन 2027 पर पूरी एकाग्रता: बैठक के बाद नेताओं ने स्पष्ट किया कि पार्टी के भीतर कोई मतभेद नहीं है और पूरी ताकत आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव में लगातार तीसरी बार ‘हैट्रिक’ सरकार बनाने पर केंद्रित है।
- क्या था पूरा अरविंद पांडेय विवाद: बता दें कि मई की शुरुआत में सोशल मीडिया पर एक फर्जी शिकायत पत्र वायरल हुआ था, जिसके तार पूर्व शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय से जुड़े बताए जा रहे थे।
- कांग्रेस ने बनाया था राजनैतिक मुद्दा: इस कथित पत्र को कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने मीडिया के सामने सार्वजनिक कर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रशासनिक मशीनरी पर गंभीर आरोप लगाए थे।
- पत्र में लगाए गए थे गंभीर आरोप: वायरल पत्र में आरोप लगाया गया था कि विधायक और उनके परिवार को झूठे मुकदमों में फंसाकर प्रताड़ित किया जा रहा है और उनकी जान को खतरा है।
- अरविंद पांडेय की दोटूक सफाई: मामला तूल पकड़ते ही भाजपा के केंद्रीय और प्रादेशिक आलाकमान ने तुरंत संज्ञान लिया और विधायक अरविंद पांडेय को देहरादून स्थित पार्टी मुख्यालय तलब किया गया।
- प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया खंडन: अरविंद पांडेय ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट से लंबी बातचीत के बाद बकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई और साफ किया कि उन्होंने मुख्यमंत्री या केंद्रीय नेतृत्व को ऐसा कोई पत्र नहीं लिखा है।
- विपक्ष के पत्र को बताया पूरी तरह फर्जी: विधायक पांडेय ने मीडिया के सामने कड़े शब्दों में कहा कि कांग्रेस द्वारा पेश किया गया यह कथित पत्र पूरी तरह से मनगढ़ंत, जाली और आधारहीन है।
- पार्टी के साथ खड़े रहने का संकल्प: उन्होंने दोहराया कि वे भाजपा के एक समर्पित और अनुशासित कार्यकर्ता हैं तथा उनका मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और संगठन के प्रति अटूट विश्वास है।
- भाजपा का डैमेज कंट्रोल: भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने भी कांग्रेस के इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे विपक्ष की हताशा का परिचायक बताया था।
- राष्ट्रीय अध्यक्ष का दौरा: इस सियासी विवाद को शांत करने में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के देहरादून प्रवास ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिन्होंने सभी असंतुष्ट कड़ियों को एकजुट किया।
- एकजुटता का संदेश: मुख्यमंत्री आवास और सचिवालय के स्तर पर हुई बैठकों का मुख्य उद्देश्य जनता और कार्यकर्ताओं के बीच यह संदेश देना था कि सरकार और संगठन में किसी तरह की गुटबाजी नहीं है।
- जमीनी स्तर पर काम करने के निर्देश: मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट किया कि पार्टी के सभी विधायकों को अपने-अपने क्षेत्रों में विकास कार्यों की गति बढ़ाने और जनता की समस्याओं का समय पर निस्तारण करने के निर्देश दिए गए हैं।
- विकास योजनाओं की समीक्षा: इस दौरान मुख्यमंत्री धामी ने उधम सिंह नगर और गदरपुर विधानसभा क्षेत्र से जुड़ी विभिन्न विकास परियोजनाओं की प्रगति का भी जायजा लिया।
- केंद्रीय नेतृत्व का मुख्यमंत्री पर भरोसा: भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया है कि उत्तराखंड में 2027 का अगला विधानसभा चुनाव पुष्कर सिंह धामी के ही कुशल नेतृत्व में लड़ा जाएगा।
- विपक्ष की रणनीति हुई फेल: वरिष्ठ नेताओं के समय पर किए गए हस्तक्षेप और अरविंद पांडेय द्वारा सार्वजनिक रूप से दिए गए स्पष्टीकरण के बाद कांग्रेस का यह राजनैतिक दांव पूरी तरह से विफल साबित हुआ है।
- डबल इंजन सरकार की उपलब्धियां सर्वोपरि: बैठक में तय हुआ कि समान नागरिक संहिता (UCC) के ऐतिहासिक कार्यान्वयन और सशक्त धर्मांतरण विरोधी कानून जैसे राज्य सरकार के बड़े फैसलों को जनता के बीच ले जाया जाएगा।
- नियमित बैठकों का दौर रहेगा जारी: आंतरिक लोकतंत्र और संवाद को मजबूत बनाए रखने के लिए मुख्यमंत्री, सांसदों और विधायकों के बीच समन्वय बैठकों का यह सिलसिला लगातार जारी रखने का फैसला लिया गया है।
- हैट्रिक का संकल्प मजबूत: आखिरकार, सभी विवादों को पीछे छोड़ते हुए उत्तराखंड भाजपा अब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को “बॉस” स्वीकार कर मिशन 2027 के विजय रथ को आगे बढ़ाने में पूरी ताकत से जुट गई है।