एंटी-टेररिज्म स्क्वाड (ATS) ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए पाकिस्तानी गैंगस्टर्स और आईएसआई (ISI) समर्थित स्लीपर सेल नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। एटीएस की टीम ने उत्तराखंड के हरिद्वार (रुड़की) समेत उत्तर प्रदेश के सहारनपुर और मुजफ्फरनगर से कुल 4 संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, इन चारों आरोपियों को सीमा पार बैठे हैंडलर्स द्वारा भारत के कई महत्वपूर्ण और संवेदनशील प्रतिष्ठानों, जिनमें प्रमुख अस्पताल और स्कूल शामिल हैं, को बम से उड़ाने और भारी तबाही मचाने का बड़ा टास्क सौंपा गया था। 
पकड़े गए आरोपियों में से एक संदिग्ध उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के रुड़की का रहने वाला है, जिसकी पहचान मुशर्रफ (22 वर्ष) के रूप में हुई है। इस गिरफ्तारी के बाद देवभूमि और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर आ गई हैं। 

गिरफ्तार किए गए 4 संदिग्धों की पहचान
एटीएस द्वारा जारी की गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस स्लीपर सेल मॉड्यूल से जुड़े जिन चार लोगों को हिरासत में लिया गया है, उनके नाम और पते इस प्रकार हैं:
  1. मुशर्रफ (उम्र 22 वर्ष) – निवासी: रुड़की, जिला हरिद्वार, उत्तराखंड।
  2. महकाब (उम्र 22 वर्ष) – निवासी: जिला सहारनपुर, उत्तर प्रदेश।
  3. शाहरुख (उम्र 20 वर्ष) – निवासी: जिला सहारनपुर, उत्तर प्रदेश।
  4. गगनदीप सिंह उर्फ गुरी सिंह (उम्र 25 वर्ष) – निवासी: जिला मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश। 

ईद की छुट्टी पर घर आया था हरिद्वार का मुशर्रफ
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हरिद्वार के रुड़की का रहने वाला मुशर्रफ ईद के मौके पर अपने घर छुट्टी मनाने आया हुआ था। एटीएस को जब उसके पाकिस्तानी नेटवर्क से जुड़े होने के पुख्ता इनपुट मिले, तो स्थानीय पुलिस के सहयोग से त्वरित छापेमारी कर उसे दबोच लिया गयामुशर्रफ की इस तरह अचानक गिरफ्तारी के बाद पूरे रुड़की और हरिद्वार शहर में हड़कंप का माहौल है। जांच एजेंसियों को अंदेशा है कि वह स्थानीय स्तर पर कुछ अन्य युवाओं को भी इस खतरनाक विचारधारा से जोड़ने का प्रयास कर रहा था। 

सोशल मीडिया और इंस्टाग्राम के जरिए बुना गया साजिश का जाल
एटीएस की शुरुआती पूछताछ में यह बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि ये चारों आरोपी किसी पारंपरिक तरीके से नहीं, बल्कि आधुनिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए देश विरोधी ताकतों के संपर्क में आए थे।
  • पाकिस्तानी हैंडलर्स से संपर्क: मुख्य आरोपी महकाब और गगनदीप सिंह इंस्टाग्राम के माध्यम से कुख्यात पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी और आबिद जट्ट के सीधे संपर्क में आए थे
  • नेटवर्क का विस्तार: इंस्टाग्राम पर जुड़ने के बाद इन दोनों ने अपने साथ सहारनपुर के शाहरुख और हरिद्वार के मुशर्रफ को भी इस खतरनाक साजिश का हिस्सा बना लिया
  • वर्चुअल कॉलिंग का इस्तेमाल: एटीएस की जांच के अनुसार, ये आरोपी पकड़े जाने से बचने के लिए सामान्य फोन कॉल के बजाय केवल वीडियो कॉलिंग ऐप्स और एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड सोशल मीडिया चैट का इस्तेमाल करते थे। 

नोएडा में हुई थी सीक्रेट मीटिंग, हथियार खरीदने की थी प्लानिंग
जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस मॉड्यूल के सदस्य सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं थे, बल्कि वे जमीनी स्तर पर भी बड़ी घटना को अंजाम देने की तैयारी कर चुके थे।
  1. नोएडा की बैठक: कुछ समय पहले इन आरोपियों ने दिल्ली से सटे नोएडा में एक गोपनीय बैठक (सीक्रेट मीटिंग) की थी, जिसमें आतंकी साजिशों को अमलीजामा पहनाने की रणनीति बनाई गई।
  2. फंडिंग और हथियारों की व्यवस्था: नोएडा की इस बैठक में पाकिस्तानी हैंडलर्स की तरफ से पैसों (फंडिंग) के इंतजाम और अत्याधुनिक हथियारों की डिलीवरी को लेकर गहन बातचीत हुई थी।
  3. अस्पताल को उड़ाने का सौदा: मुशर्रफ और उसके साथियों के बीच सोशल मीडिया पर एक प्रमुख अस्पताल को बम से उड़ाने के लिए हथियार खरीदने की डील चल रही थी, जिसे एटीएस ने समय रहते इंटरसेप्ट कर लिया और पूरी साजिश को नाकाम कर दिया 

डिजिटल उपकरणों की हो रही है फॉरेंसिक जांच
एटीएस ने आरोपियों के पास से कई स्मार्टफोन, सिम कार्ड और अन्य संदिग्ध डिजिटल सामग्रियां बरामद की हैं। इन सभी उपकरणों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है ताकि उनके डिलीट किए गए चैट, कॉल रिकॉर्ड्स और पाकिस्तानी हैंडलर्स के आईपी एड्रेस (IP Address) को ट्रैक किया जा सके। [1]
एटीएस के अधिकारियों का कहना है कि यह इस स्लीपर सेल नेटवर्क का चौथा ग्रुप है जिसे ध्वस्त किया गया है। फिलहाल चारों आरोपियों को रिमांड पर लेकर सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि राज्य में इनके और कौन-कौन से मददगार (लोकल सिम्पैथाइजर्स) सक्रिय हैं। हरिद्वार और सहारनपुर के सीमावर्ती इलाकों में सघन चेकिंग अभियान भी शुरू कर दिया गया है।

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