देहरादून (23 अप्रैल 2026):
संसद में ‘नारी शक्ति वंदन संशोधन अधिनियम’ (131वां संविधान संशोधन विधेयक) के पारित न हो पाने को लेकर उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने विपक्ष के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। राज्य सरकार ने इस मुद्दे पर चर्चा करने और विपक्षी दलों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित करने के लिए उत्तराखंड विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र आयोजित करने की तैयारी की है।
संसद में ‘नारी शक्ति वंदन संशोधन अधिनियम’ (131वां संविधान संशोधन विधेयक) के पारित न हो पाने को लेकर उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने विपक्ष के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। राज्य सरकार ने इस मुद्दे पर चर्चा करने और विपक्षी दलों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित करने के लिए उत्तराखंड विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र आयोजित करने की तैयारी की है।
मुख्य घटनाक्रम और तैयारी:
- विशेष सत्र का उद्देश्य: धामी सरकार इस सत्र के माध्यम से यह संदेश देना चाहती है कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने तकनीकी बाधाएं उत्पन्न कर महिलाओं को मिलने वाले 33% आरक्षण को रोका है। सत्र में विपक्ष के इस ‘नारी विरोधी’ रुख के खिलाफ आधिकारिक रूप से निंदा प्रस्ताव लाया जाएगा।
- सीएम धामी का हमला: मुख्यमंत्री धामी ने विपक्षी दलों (कांग्रेस, सपा, टीएमसी और डीएमके) को “महिला विरोधी” करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इन दलों ने अपने राजनीतिक स्वार्थ के कारण करोड़ों माताओं और बहनों के अधिकारों की “भ्रूण हत्या” की है।
- संसद में विफलता का असर: ज्ञात हो कि 18 अप्रैल को लोकसभा में इस विधेयक को आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल सका था, जिसके बाद से भाजपा देशव्यापी अभियान चलाकर विपक्ष को घेर रही है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं:
- विधानसभा अध्यक्ष का बयान: उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने विधेयक के गिरने को महिलाओं के लिए “काला दिन” बताया है।
- विपक्ष का पलटवार: उत्तराखंड कांग्रेस ने सरकार को चुनौती दी है कि यदि वे वास्तव में महिला सशक्तिकरण चाहते हैं, तो विशेष सत्र में राज्य की नौकरियों और निकाय चुनाव में महिलाओं के लिए आरक्षण को मजबूती से लागू करने का प्रस्ताव लाएं, न कि केवल राजनीति करें।
क्या है नारी शक्ति वंदन संशोधन अधिनियम?
यह विधेयक 2029 से लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का प्रावधान करता है। विपक्ष ने इसके कार्यान्वयन को परिसीमन और जनगणना से जोड़ने का विरोध किया था, जिसके कारण सदन में गतिरोध पैदा हुआ।
यह विधेयक 2029 से लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का प्रावधान करता है। विपक्ष ने इसके कार्यान्वयन को परिसीमन और जनगणना से जोड़ने का विरोध किया था, जिसके कारण सदन में गतिरोध पैदा हुआ।