पौड़ी गढ़वाल (उत्तराखंड):
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में मानव और वन्यजीव संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है। पौड़ी गढ़वाल जिले से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ नैनीडांडा विकासखंड के अंतर्गत आने वाली पट्टी बिजलौट के ग्राम सत्खोलू के तोक ग्राम बणासी तल्ली में एक गुलदार ने दिनदहाड़े एक बुजुर्ग महिला पर हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया। इस घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में दहशत और मातम का माहौल है। वहीं, लंबे समय से गुलदार की धमक से परेशान ग्रामीणों का गुस्सा वन विभाग के खिलाफ फूट पड़ा है।
कैसे हुई यह दर्दनाक घटना?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शनिवार सुबह लगभग 10 से 11 बजे के बीच बणासी तल्ली गांव की दो महिलाएं, सुशीला देवी (उम्र 64 वर्ष) पत्नी राजेंद्र सिंह और उनके पड़ोस की शांति देवी, रोजमर्रा की तरह मवेशियों के लिए चारा जुटाने के उद्देश्य से गांव के पास ही ऊपरी पहाड़ी इलाके में स्थित खेतों/जंगल की ओर गई थीं। दोनों महिलाएं खेतों में घास काट रही थीं, तभी झाड़ियों के पीछे पहले से ही घात लगाकर बैठे एक खूंखार गुलदार ने अचानक सुशीला देवी पर पीछे से जानलेवा हमला कर दिया।
गुलदार का हमला इतना अचानक और जोरदार था कि सुशीला देवी को संभलने का मौका ही नहीं मिला। गुलदार महिला को अपने जबड़े में दबाकर घसीटते हुए कई खेत ऊपर जंगल की तरफ ले जाने लगा। कुछ ही दूरी पर मौजूद शांति देवी ने जब अपनी साथी को गुलदार के चंगुल में देखा, तो उनके होश उड़ गए। उन्होंने हिम्मत जुटाकर जोर-जोर से शोर मचाना शुरू किया और गांव की तरफ दौड़ पड़ीं।
ग्रामीणों ने ढूँढा क्षत-विक्षत शव
शांति देवी की चीख-पुकार सुनकर भारी संख्या में ग्रामीण लाठी-डंडे लेकर तुरंत घटनास्थल की ओर दौड़े। ग्रामीणों के एकजुट होकर शोर मचाने पर गुलदार महिला को छोड़कर घने जंगलों की ओर भाग निकला। हालांकि, जब तक ग्रामीण सुशीला देवी के पास पहुंचे, तब तक गुलदार उनका प्राणांत कर चुका था। ग्रामीणों को खेतों में झाड़ियों के पीछे सुशीला देवी का लहूलुहान और अधखाया शव बरामद हुआ। इस भयावह दृश्य को देखकर मृतका के परिजनों में कोहराम मच गया।
वन विभाग के खिलाफ फूटा ग्रामीणों का गुस्सा
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम और स्थानीय पुलिस बल मौके पर पहुंचे। लेकिन जैसे ही विभागीय अधिकारी गांव में दाखिल हुए, उन्हें स्थानीय ग्रामीणों के भारी विरोध और तीखे आक्रोश का सामना करना पड़ा। गुस्साए ग्रामीणों ने शव को उठाने से रोक दिया और वन विभाग के अधिकारियों का घेराव करते हुए जमकर नारेबाजी की।
ग्रामीणों का आरोप है कि इस क्षेत्र में पिछले कई महीनों से गुलदार की सक्रियता बनी हुई थी, जिससे लोग अपने घरों से बाहर निकलने में भी डर रहे थे। ग्रामीणों ने इस समस्या को लेकर कई बार वन विभाग को लिखित और मौखिक रूप से अवगत कराया था और पिंजरा लगाने की मांग की थी। इसके बावजूद, विभाग ने इस गंभीर समस्या को पूरी तरह से नजरअंदाज किया, जिसका खामियाजा आज एक बेकसूर बुजुर्ग महिला को अपनी जान देकर भुगतना पड़ा।
आदमखोर को तुरंत शूट करने की मांग
आक्रोशित ग्रामीणों की मांग है कि इस गुलदार को तुरंत ‘आदमखोर’ घोषित कर उसे मौके पर ही ढेर (शूट) करने के आदेश जारी किए जाएं। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक क्षेत्र में शूटर तैनात नहीं किए जाते और आदमखोर को पकड़ा या मारा नहीं जाता, तब तक वे अपने बच्चों को स्कूलों में भेजने और खुद खेतों में काम करने नहीं जा पाएंगे। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने तुरंत ठोस कदम नहीं उठाए, तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
वन विभाग की कार्रवाई और आश्वासन
तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए गढ़वाल के प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) महातिम यादव ने बताया कि वन विभाग की टीम लगातार मौके पर मुस्तैद है। ग्रामीणों को शांत कराने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गुलदार की हरकतों पर नजर रखने के लिए प्रभावित क्षेत्र में तुरंत ट्रैप कैमरे लगाए जा रहे हैं और उसे पकड़ने के लिए पिंजरा भी मंगाया जा रहा है। अधिकारियों ने आश्वस्त किया है कि उच्च अधिकारियों से वार्ता कर क्षेत्र में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाएंगे और पीड़ित परिवार को नियमानुसार उचित मुआवजा जल्द से जल्द प्रदान किया जाएगा। 
लगातार बढ़ रहा है गुलदार का खतरा
गौरतलब है कि पौड़ी गढ़वाल जिले में वन्यजीवों के हमले की यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी जून महीने के शुरुआती हफ्ते में कोट ब्लॉक के देवार क्षेत्र के बड़ियूं गांव में प्रभा देवी नाम की महिला को गुलदार ने मार डाला था, जिसके बाद वन विभाग के शूटरों ने आत्मरक्षा में उस गुलदार को ढेर किया था। लेकिन बणासी तल्ली की इस नई घटना ने यह साबित कर दिया है कि पहाड़ों में गुलदार का आतंक अब भी एक गंभीर और अनसुलझी चुनौती बना हुआ है, जिसके स्थाई समाधान के लिए सरकार को ठोस नीति बनाने की अत्यंत आवश्यकता है।

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