देहरादून:
उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने  रिपोर्ट के अनुसार शनिवार (23 मई 2026) को आईटी पार्क स्थित राज्य आपदा नियंत्रण कक्ष पहुंचकर एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। इस बैठक में मुख्य सचिव ने वर्तमान में चल रही विश्वप्रसिद्ध चारधाम यात्रा-2026, मैदानी क्षेत्रों में बढ़ रही हीट वेव (लू) और आगामी मानसून सीजन को लेकर शासन व सभी जिलाधिकारियों (DMs) को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए।
मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि मानसून की आहट और बढ़ते तापमान के बीच श्रद्धालुओं और आम जनता की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य के सभी जिलों के जिलाधिकारी और आपदा प्रबंधन से जुड़े शीर्ष अधिकारी शामिल हुए।
मानसून को लेकर पहले से रहें अलर्ट, ‘होल्डिंग एरिया’ किए जाएं सक्रिय
मुख्य सचिव ने मानसून तैयारियों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को समय से पहले सभी एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए:
  • होल्डिंग एरिया की सक्रियता: यात्रा मार्ग पर बने सभी होल्डिंग एरिया को अभी से पूरी तरह चालू किया जाए।
  • बुनियादी सुविधाएं: इन क्षेत्रों में आपात स्थिति में रुकने वाले श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त भोजन, स्वच्छ पानी, बिजली और चालू शौचालय की व्यवस्था हो।
  • इमरजेंसी इवेक्युएशन प्लान: भारी बारिश या भूस्खलन के कारण मार्ग अवरुद्ध होने पर यात्रियों को सुरक्षित निकालने के लिए मजबूत निकासी योजना तैयार रखें।
  • एयरलिफ्टिंग की तैयारी: उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) को निर्देश दिए गए कि वे दुर्गम क्षेत्रों से जरूरत पड़ने पर एयरलिफ्टिंग के लिए अपना रेस्क्यू प्लान तैयार रखें।
  • राशन का अग्रिम भंडारण: मानसून के दौरान रास्ते बंद होने की आशंका को देखते हुए संवेदनशील इलाकों में आवश्यक राशन और दवाओं का पर्याप्त स्टॉक पहले से जमा कर लिया जाए।
  • गड्ढामुक्त सड़कें: लोक निर्माण विभाग (PWD) को मानसून की भारी बारिश शुरू होने से पहले ही यात्रा मार्गों की सभी सड़कों को पूरी तरह दुरुस्त और गड्ढामुक्त करने के निर्देश दिए गए हैं।

चारधाम यात्रा में स्वास्थ्य स्क्रीनिंग और आयु सीमा पर विशेष फोकस
इस वर्ष चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की भारी उमड़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने स्वास्थ्य संबंधी नियमों को कड़ा कर दिया है:
  • अनिवार्य स्वास्थ्य जांच: पंजीकरण प्रक्रिया के दौरान ही यात्रियों की बारीकी से हेल्थ स्क्रीनिंग की जा रही है।
  • बुजुर्गों व बच्चों के लिए परामर्श: मुख्य सचिव ने कहा कि 60 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों, गंभीर बीमारियों (जैसे हृदय रोग, सांस की तकलीफ) से पीड़ित व्यक्तियों और छोटे बच्चों वाले परिवारों को अत्यधिक ऊंचाई वाले संवेदनशील क्षेत्रों की यात्रा से बचने या बेहद सतर्क रहने की सलाह दी जाए।
  • भ्रामक सूचनाओं पर कड़ा एक्शन: सोशल मीडिया पर आपदा या यात्रा को लेकर फैलाई जा रही फर्जी वीडियो और भ्रामक अफवाहों पर मुख्य सचिव ने सख्त नाराजगी जताई। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसी अफवाहें फैलाने वालों के खिलाफ आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत तुरंत एफआईआर (FIR) दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।

हीट वेव (लू) से निपटने के लिए जिलाधिकारियों को निर्देश
उत्तराखंड के मैदानी इलाकों (जैसे हरिद्वार, उधमसिंह नगर और देहरादून के मैदानी भाग) में बढ़ते तापमान और हीट वेव के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने कमर कस ली है:
  • पेयजल की निर्बाध आपूर्ति: मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को सार्वजनिक स्थानों, बस अड्डों और यात्रा पड़ावों पर ठंडे पानी के प्याऊ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
  • अस्पतालों में विशेष इंतजाम: सभी सरकारी और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर हीट स्ट्रोक (लू लगना) से निपटने के लिए ओआरएस (ORS) पैकेट, आवश्यक दवाएं और ‘हीट वेव वार्ड’ को सक्रिय रखने के आदेश जारी किए गए हैं।
  • जागरूकता अभियान: स्थानीय स्तर पर लोगों और यात्रियों को हीट वेव से बचने के उपायों के बारे में लगातार जागरूक करने के लिए प्रचार-प्रसार अभियान चलाने को कहा गया है।

हाई-टेक मॉनिटरिंग और सुरक्षा व्यवस्था
बैठक में आपदा प्रबंधन विभाग ने मुख्य सचिव को अवगत कराया कि राज्य में आपदा प्रबंधन तंत्र को हाई-टेक कर दिया गया है:
  • सक्रिय हाइड्रोमेट सेंसर: राज्य भर के संवेदनशील और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में वर्तमान में 525 हाइड्रोमेट सेंसर पूरी तरह सक्रिय हैं, जो पल-पल की डिजिटल निगरानी कर रहे हैं।
  • डॉप्लर वेदर रडार: मौसम के सटीक पूर्वानुमान के लिए राज्य में वर्तमान में 3 डॉप्लर वेदर रडार काम कर रहे हैं, जबकि 3 नए रडार स्थापित करने की प्रक्रिया भी गति पर है।
  • सुरक्षा बलों की तैनाती: यात्रा मार्गों के सुपर जोन और संवेदनशील चोक पॉइंट्स पर एसडीआरएफ (SDRF), एनडीआरएफ (NDRF), फायर सर्विस और स्थानीय पुलिस बल को मुस्तैद रखा गया है।
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने अंत में अधिकारियों को आपसी समन्वय (Coordination) के साथ काम करने की हिदायत दी ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में ‘क्विक रिस्पॉन्स टाइम’ के भीतर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया जा सके।

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