प्राकृतिक आपदाओं और वर्षा जनित संकटों की दृष्टि से बेहद संवेदनशील उत्तराखंड ने आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी एक मजबूत पहचान दर्ज कराई है. भारत की अध्यक्षता में ओडिशा के पुरी में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) आपदा जोखिम न्यूनीकरण (DRR) कार्य समूह की द्वितीय तकनीकी बैठक में उत्तराखंड राज्य के आपदा प्रबंधन मॉडल की मुक्त कंठ से सराहना की गई है. इस वैश्विक सम्मेलन में भागीदार देशों के विशेषज्ञों ने माना कि उत्तराखंड जैसी कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में विकसित किया गया सुरक्षा और रिस्पांस मॉडल पूरी दुनिया के लिए एक वैश्विक नजीर बन चुका है.

ब्रिक्स बैठक का मुख्य उद्देश्य और उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व
  • आयोजन और तिथि: भारत की मेजबानी में ओडिशा के पुरी में आपदा जोखिम न्यूनीकरण को लेकर महत्वपूर्ण तीन दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया. 
  • मुख्य एजेंडा: बैठक का मुख्य उद्देश्य आपदा जोखिम न्यूनीकरण, मजबूत बुनियादी अवसंरचना, समुदाय आधारित पूर्व चेतावनी प्रणाली (Early Warning System), पूर्वानुमान आधारित त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र और सतत वित्तीय व्यवस्थाओं पर सदस्य देशों के अनुभवों का आदान-प्रदान करना था. 
  • उत्तराखंड के प्रतिनिधि: इस उच्च स्तरीय वैश्विक सम्मेलन में उत्तराखंड राज्य की ओर से एसडीआरएफ के सेनानायक अर्पण यदुवंशी (IPS) और उत्तराखंड भूस्खलन न्यूनीकरण और प्रबंधन केंद्र (ULMMC) के निदेशक शांतनु सरकार ने भाग लिया और राज्य की ओर से विस्तृत प्रस्तुति दी. 

चर्चा का केंद्र बना ‘सिल्क्यारा टनल रेस्क्यू’ मॉडल
ब्रिक्स देशों के सम्मेलन में उत्तराखंड की प्रस्तुति के दौरान उत्तरकाशी के सिल्क्यारा सुरंग बचाव अभियान (Silkyara Tunnel Rescue) को विशेष रूप से रेखांकित किया गया. 
  1. अथक बचाव अभियान: टनल में फंसे 41 श्रमिकों को 17 दिनों की अत्यंत चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में सुरक्षित बाहर निकालना भारत की सर्वोच्च आपदा प्रबंधन क्षमता को दर्शाता है. 
  2. समन्वय की अनूठी मिसाल: इस अभियान में आधुनिक अंतरराष्ट्रीय तकनीक, केंद्र-राज्य की विभिन्न एजेंसियों और रैट माइनर्स (Rat Miners) के बीच जो अद्वितीय समन्वय देखने को मिला, उसे दुनिया के सामने एक अनुकरणीय केस स्टडी के रूप में सराहा गया. 
  3. वैश्विक मंच पर पहचान: वैश्विक विशेषज्ञों ने माना कि अत्यधिक दबाव और जोखिम वाली विषम परिस्थितियों में इतना सटीक और सुरक्षित रेस्क्यू ऑपरेशन चलाना अपने आप में एक मिसाल है. 

हिमालयी चुनौतियों के बीच कैसे विकसित हुआ यह मजबूत मॉडल?
प्रस्तुति के दौरान अधिकारियों ने वैश्विक प्रतिनिधियों को अवगत कराया कि उत्तराखंड को हर वर्ष भूस्खलन, बादल फटने, अतिवृष्टि, ग्लेशियर झीलों के फटने के खतरे (GLOF), अचानक सड़क अवरुद्ध होने और लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी वाली चारधाम यात्रा जैसे बहु-जोखिमों का लगातार सामना करना पड़ता है. इन भौगोलिक और प्राकृतिक चुनौतियों से निपटने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य ने निम्नलिखित मजबूत व्यवस्थाएं खड़ी की हैं: 
  • मल्टी-एजेंसी कोऑर्डिनेशन: राज्य की सभी तकनीकी, वैज्ञानिक और राहत एजेंसियों के बीच एक लाइव नेटवर्क स्थापित है, जिससे तुरंत निर्णय लिए जाते हैं. 
  • तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था: भू-स्थानिक तकनीक (Geospatial Technology), रिमोट सेंसिंग, सैटेलाइट डेटा एनालिटिक्स और अत्याधुनिक पूर्व चेतावनी प्रणालियों (Early Warning Systems) के माध्यम से संभावित संवेदनशील क्षेत्रों की रीयल-टाइम ट्रैकिंग की जाती है. 
  • कम्युनिटी-बेस्ड आपदा मित्र और आपदा सखी: न्याय पंचायत और ग्राम स्तर पर स्थानीय नागरिकों और महिला स्वयंसेवकों को प्राथमिक चिकित्सा और त्वरित सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रशिक्षित किया गया है, ताकि मुख्य रेस्क्यू टीम के पहुंचने से पहले राहत कार्य शुरू हो सके. 
  • एसडीआरएफ (SDRF) की त्वरित प्रतिक्रिया: उत्तराखंड की राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF) अत्यधिक आधुनिक उपकरणों से लैस है और देश की सबसे कुशल और त्वरित प्रतिक्रिया टीमों में गिनी जाती है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed