उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को देहरादून स्थित शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में आयोजित एक भव्य विचार गोष्ठी को संबोधित किया। इस संगोष्ठी का मुख्य विषय “विकसित भारत 2047 के निर्माण में उच्च शिक्षा का महत्त्व” रखा गया था। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे मुख्यमंत्री ने शिक्षा व्यवस्था में तकनीकी समावेशन और डिजिटल क्रांति पर विशेष जोर दिया। आधिकारिक रिपोर्टों तथा प्रमुख समाचार पत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री के संबोधन की विस्तृत ग्राउंड रिपोर्ट नीचे 20 महत्वपूर्ण बिंदुओं में प्रस्तुत की गई है:
- मुख्य वक्तव्य और आधारशिला: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने भाषण की शुरुआत करते हुए कहा कि उच्च शिक्षा केवल ज्ञान अर्जन या डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं है।
- आत्मनिर्भर भारत का विजन: उन्होंने स्पष्ट किया कि उच्च शिक्षा ही वास्तव में एक विकसित, आत्मनिर्भर और पूर्णतः समृद्ध भारत के निर्माण की असली आधारशिला है।
- प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की सराहना: सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में देश के भीतर शिक्षा, नवाचार (इनोवेशन) और अनुसंधान के क्षेत्र में अभूतपूर्व बदलाव हुए हैं।
- कौशल विकास पर बड़ा फोकस: उन्होंने कहा कि आज की शिक्षा व्यवस्था केवल थ्योरी तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं के कौशल विकास (स्कील डेवलपमेंट) को शीर्ष प्राथमिकता दी जा रही है।
- लक्ष्य 2047 को हासिल करना: मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे ये सुधार वर्ष 2047 तक भारत को एक वैश्विक महाशक्ति और विकसित राष्ट्र बनाने में मील का पत्थर साबित होंगे।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की महत्ता: संगोष्ठी में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने इसे भारतीय शिक्षा प्रणाली के प्राचीन गौरव को पुनर्स्थापित करने वाली ऐतिहासिक पहल बताया।
- सर्वांगीण विकास का जरिया: एनईपी विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, व्यावहारिक कौशल और रचनात्मकता को बढ़ावा देकर उन्हें भविष्य की वैश्विक चुनौतियों के लिए तैयार कर रही है।
- उच्च शिक्षण संस्थानों के स्वरूप में बदलाव: उन्होंने देश के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों का आह्वान करते हुए कहा कि अब समय आ गया है जब शिक्षण संस्थानों को केवल दैनिक शिक्षण केंद्रों से ऊपर उठना होगा।
- अनुसंधान के उत्कृष्ट केंद्र बनें कॉलेज: कॉलेजों को ज्ञान, उच्च स्तरीय अनुसंधान, और नई खोजों के उत्कृष्ट प्रयोगशालाओं तथा विशिष्ट हब के रूप में विकसित किया जाना अनिवार्य है।
- डिजिटल इंडिया से मिली तेज रफ्तार: मुख्यमंत्री ने डिजिटल इंडिया अभियान की प्रशंसा करते हुए कहा कि इंटरनेट, एआई और तकनीकी सशक्तिकरण ने देश के कोने-कोने में विकास को तीव्र गति प्रदान की है।
- उत्तराखंड की प्राचीन गौरवशाली परंपरा: उन्होंने गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि देवभूमि उत्तराखंड सदियों से शिक्षा, उच्च ज्ञान और अध्यात्म की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का मुख्य केंद्र रहा है।
- राज्य सरकार के प्रयास: राज्य सरकार वर्तमान में प्रदेश के भीतर आधुनिक शिक्षा पद्धतियों, डिजिटल लर्निंग और मजबूत भारतीय जीवन मूल्यों पर आधारित शिक्षा व्यवस्था को निरंतर सुदृढ़ कर रही है।
- आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार: उत्तराखंड के सरकारी कॉलेजों और स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल लाइब्रेरी और ऑनलाइन शिक्षण सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है।
- भविष्य की तकनीकों का समावेश: वर्तमान समय की मांग को देखते हुए पाठ्यक्रम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग और डेटा साइंस जैसे आधुनिक विषयों को भी प्रमुखता से जोड़ा जा रहा है।
- सेंटर फॉर हिंदू स्टडीज की स्थापना: मुख्यमंत्री ने दून विश्वविद्यालय में नवनिर्मित ‘सेंटर फॉर हिंदू स्टडीज’ का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि यह केंद्र हमारी सनातन ज्ञान परंपरा और प्राचीन वैज्ञानिक अनुसंधानों को नई दिशा प्रदान करेगा।
- एकेडेमिया और इंडस्ट्री का समन्वय: बदलते वैश्विक परिदृश्य को देखते हुए राज्य सरकार उद्योगों (इंडस्ट्री) और शैक्षणिक संस्थानों के बीच आपसी समन्वय और एमओयू (MoU) को लगातार बढ़ावा दे रही है।
- इंटर्नशिप और स्टार्टअप को बढ़ावा: प्रदेश के युवाओं के लिए इंडस्ट्री-लिंक्ड पाठ्यक्रम, विभिन्न व्यावसायिक इंटर्नशिप कार्यक्रमों तथा नए स्टार्टअप और इन्क्यूबेशन सेंटरों को हर स्तर पर प्रोत्साहित किया जा रहा है।
- रोजगार प्रदाता बनने का आह्वान: राज्य सरकार का मुख्य संकल्प और विजन यह है कि उत्तराखंड का युवा केवल रोजगार की तलाश करने वाला न बने, बल्कि वह स्वयं नए रोजगार सृजित करने वाला (जॉब गिवर) बने।
- समारोह में गरिमामयी उपस्थिति: इस महत्वपूर्ण विचार गोष्ठी के दौरान मंच पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, राज्यसभा सांसद व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, और प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत भी मौजूद रहे।
- शिक्षाविदों का महाजुटान: कार्यक्रम में शिवालिक कॉलेज के अध्यक्ष सुनील कुमार, उपाध्यक्ष अजय कुमार सहित उत्तराखंड के विभिन्न राजकीय व निजी विश्वविद्यालयों के कुलपति, वरिष्ठ शिक्षाविद और सैकड़ों छात्र उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के इस सारगर्भित संबोधन और डिजिटल विजन से स्पष्ट है कि उत्तराखंड सरकार राज्य के युवाओं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए शिक्षा के आधुनिकीकरण को लेकर पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।