उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने पूर्व सैनिकों और अग्निवीर योजना के तहत सेवा पूर्ण कर लौटने वाले युवाओं के हित में एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी की है। राज्य के गृह विभाग स्तर पर इस संबंध में गहन विचार-विमर्श और मंथन का दौर अंतिम चरण में पहुंच चुका है। माना जा रहा है कि इस नई ‘शस्त्र लाइसेंस नीति’ को मंजूरी देने के लिए जल्द ही होने वाली प्रदेश कैबिनेट की बैठक में आधिकारिक प्रस्ताव लाया जाएगा।
सैन्य सेवा के रिकॉर्ड को दी जाएगी प्राथमिकता
इस नई नीति के तहत सबसे बड़ा बदलाव शस्त्र लाइसेंस आवेदन की प्रक्रिया में देखने को मिलेगा। वर्तमान व्यवस्था में शस्त्र लाइसेंस प्राप्त करने के लिए लंबी पुलिस वेरिफिकेशन (सत्यापन) प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जिसमें महीनों का समय लग जाता है। नई नीति के प्रावधानों के तहत:
इस नई नीति के तहत सबसे बड़ा बदलाव शस्त्र लाइसेंस आवेदन की प्रक्रिया में देखने को मिलेगा। वर्तमान व्यवस्था में शस्त्र लाइसेंस प्राप्त करने के लिए लंबी पुलिस वेरिफिकेशन (सत्यापन) प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जिसमें महीनों का समय लग जाता है। नई नीति के प्रावधानों के तहत:
- सरल पुलिस सत्यापन: पूर्व सैनिकों को सामान्य नागरिकों की तरह जटिल पुलिस जांच प्रक्रिया से नहीं गुजरना होगा, बल्कि उनके सैन्य रिकॉर्ड को ही प्राथमिकता दी जाएगी।
- सैन्य अनुशासन का सम्मान: सेना में हथियार संभालने के उनके दीर्घकालिक अनुभव और प्रमाणित अनुशासन को लाइसेंस जारी करने का मुख्य आधार माना जाएगा।
- त्वरित निस्तारण: जिलाधिकारी (DM) कार्यालयों को पूर्व सैनिकों के आवेदनों पर एक निश्चित समय सीमा के भीतर निर्णय लेने के कड़े निर्देश दिए जाएंगे।
अग्निवीरों के लिए रोजगार और विशेष पैकेज
शस्त्र नीति के अलावा, धामी सरकार अग्निवीरों के पुनर्वास और उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए पहले से ही कई बड़े कदम उठा चुकी है। मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट किया है कि सेना से प्रशिक्षित होकर लौटने वाले युवा राज्य की आंतरिक सुरक्षा को और अधिक मजबूत बना सकते हैं। इसी उद्देश्य से:
शस्त्र नीति के अलावा, धामी सरकार अग्निवीरों के पुनर्वास और उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए पहले से ही कई बड़े कदम उठा चुकी है। मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट किया है कि सेना से प्रशिक्षित होकर लौटने वाले युवा राज्य की आंतरिक सुरक्षा को और अधिक मजबूत बना सकते हैं। इसी उद्देश्य से:
- 10% क्षैतिज आरक्षण: राज्य सरकार ने पुलिस, जेल प्रहरी, वन सुरक्षा बल, और आबकारी जैसे विभिन्न वर्दीधारी विभागों में पूर्व अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण (Horizontal Reservation) को पहले ही कानूनी मंजूरी दे दी है।
- शारीरिक दक्षता परीक्षा से छूट: सरकारी नौकरियों में सीधी भर्ती के दौरान पूर्व अग्निवीरों को शारीरिक दक्षता परीक्षा (Physical Test) देने से पूरी तरह छूट दी जाएगी।
- आयु सीमा में रियायत: उनकी सेवा अवधि के बराबर उन्हें अधिकतम आयु सीमा में विशेष छूट दी जाएगी, ताकि वे बिना किसी तकनीकी बाधा के आवेदन कर सकें।
- प्राइवेट सेक्टर में रोजगार और स्वरोजगार: सरकार निजी सुरक्षा एजेंसियों और कॉरपोरेट जगत से भी अग्निवीरों को रोजगार देने की अपील कर रही है। साथ ही स्वरोजगार के लिए कम ब्याज दर पर ऋण योजनाएं भी तैयार की जा रही हैं।
जमीन विवादों के समाधान के लिए मुफ्त कानूनी सहायता
गृह विभाग के सूत्रों के अनुसार, सरकार पूर्व सैनिकों के बढ़ते भूमि और संपत्ति संबंधी विवादों को लेकर भी गंभीर है। कई बार ड्यूटी से लौटने के बाद सैनिकों को अपनी ही जमीन के लिए कानूनी लड़ाइयों में उलझना पड़ता है। इस समस्या से निजात दिलाने के लिए सरकार उन्हें राज्य स्तर पर निशुल्क कानूनी सहायता (Free Legal Aid) उपलब्ध कराने के प्रस्ताव पर भी विचार कर रही है।
गृह विभाग के सूत्रों के अनुसार, सरकार पूर्व सैनिकों के बढ़ते भूमि और संपत्ति संबंधी विवादों को लेकर भी गंभीर है। कई बार ड्यूटी से लौटने के बाद सैनिकों को अपनी ही जमीन के लिए कानूनी लड़ाइयों में उलझना पड़ता है। इस समस्या से निजात दिलाने के लिए सरकार उन्हें राज्य स्तर पर निशुल्क कानूनी सहायता (Free Legal Aid) उपलब्ध कराने के प्रस्ताव पर भी विचार कर रही है।
उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण सलाहकार परिषद के अध्यक्ष कर्नल (रिटायर्ड) अजय कोठियाल ने बताया कि मुख्यमंत्री धामी के साथ इन सभी विषयों पर सकारात्मक चर्चा हुई है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप, उत्तराखंड सरकार इन वीरों के सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए प्रतिबद्ध है और जल्द ही इस नीति पर अंतिम मुहर लग जाएगी।