उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने ऊर्जा निगमों (UPCL, UJVNL और PITCUL) द्वारा प्रस्तावित 18.86% की भारी बढ़ोतरी के प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। यह राज्य गठन के बाद केवल तीसरा अवसर है जब आयोग ने ‘शून्य टैरिफ’ वृद्धि (Zero Tariff Hike) का आदेश जारी किया है। इससे पहले केवल वर्ष 2006-07 और 2014-15 में ही दरें नहीं बढ़ाई गई थीं।

खबर के मुख्य बिंदु:
  • किसे मिली राहत: राज्य के लगभग 28 लाख उपभोक्ताओं पर बढ़े हुए बिलों का कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।
  • प्रस्ताव बनाम निर्णय: ऊर्जा निगमों ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए करीब 14,731.9 करोड़ रुपये के वार्षिक राजस्व (ARR) की मांग की थी, लेकिन आयोग ने गहन समीक्षा के बाद इसे 12,489.5 करोड़ रुपये पर सीमित कर दिया।
  • सरप्लस बजट: आयोग के अनुसार, वर्तमान दरों पर ही निगम के पास लगभग 100.87 करोड़ रुपये का अधिशेष (Surplus) रहने का अनुमान है, इसलिए दरों में वृद्धि की कोई आवश्यकता नहीं समझी गई।
  • ऐतिहासिक संदर्भ: उत्तराखंड में पहला टैरिफ आदेश 2003 में जारी किया गया था। तब से लेकर अब तक के 23 वर्षों के इतिहास में यह तीसरी बार है जब जनता को इस तरह की राहत मिली है।
अन्य महत्वपूर्ण बदलाव और प्रोत्साहन:
आयोग ने दरों को यथावत रखते हुए कुछ संरचनात्मक सुधार (Structural Reforms) किए हैं:

  • डिजिटल पेमेंट पर छूट: डिजिटल माध्यम से बिल भुगतान करने पर 1.5% और अन्य माध्यमों (चेक/नकद) पर 1% की छूट जारी रहेगी।
  • प्रीपेड मीटर प्रोत्साहन: जो उपभोक्ता प्रीपेड मीटर चुनेंगे, उन्हें बिजली शुल्क (Energy Charge) में 3% से 4% की रियायत मिलेगी।
  • सिंगल प्वाइंट बल्क सप्लाई: बड़ी आवासीय सोसायटियों के लिए दर को 7.50 रुपये से घटाकर 6.25 रुपये प्रति केवीए (kVA) कर दिया गया है।
  • सोलर एनर्जी को बढ़ावा: सौर ऊर्जा के उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए 0.39 रुपये प्रति यूनिट का ‘ग्रीन टैरिफ’ अनुमोदित किया गया है।

प्रभावी तिथि: ये नई दरें (यानी यथावत दरें) आज, 1 अप्रैल 2026 से पूरे प्रदेश में लागू हो गई हैं।

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