उत्तराखंड कांग्रेस में मची अंदरूनी कलह के बीच पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सक्रिय राजनीति से 15 दिनों के अवकाश (अर्जित अवकाश) की घोषणा कर सबको चौंका दिया है। इस दौरान उन्होंने पार्टी के भीतर चल रहे विवादों पर खामोशी अख्तियार कर रखी है, जिसे राजनीतिक हलकों में ‘तूफान से पहले की शांति’ माना जा रहा है। उत्तराखंड में मिशन 2027 से पहले कांग्रेस एक बार फिर गुटबाजी के भंवर में फंस गई है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत (हरदा) की नाराजगी और उनके द्वारा लिए गए ‘राजनीतिक ब्रेक’ ने संगठन के भीतर के तनाव को सार्वजनिक कर दिया है।
विवाद की मुख्य वजह:
- संजय नेगी की जॉइनिंग पर रोक: सूत्रों के अनुसार, विवाद की ताज़ा वजह रामनगर के नेता संजय नेगी की कांग्रेस में वापसी रुकना है। हरीश रावत उन्हें पार्टी में शामिल करवाना चाहते थे, लेकिन ऐन मौके पर नेतृत्व ने इस पर रोक लगा दी, जिससे रावत आहत बताए जा रहे हैं।
- दो धड़ों में बंटी पार्टी: राज्य कांग्रेस फिलहाल स्पष्ट रूप से दो गुटों में बंटी नजर आ रही है। एक ओर हरीश रावत के समर्थक हैं, जिनमें धारचूला विधायक हरीश धामी मुखर होकर रावत के समर्थन में उतर आए हैं, तो दूसरी ओर विरोधी गुट सक्रिय है।
हरीश रावत का ‘मौन’ और ब्रेक:
हरीश रावत ने फेसबुक के जरिए घोषणा की कि वह 15 दिनों के लिए ‘अर्जित अवकाश’ पर जा रहे हैं। जानकारों का मानना है कि यह पार्टी आलाकमान को एक संदेश देने का तरीका है। हालांकि, इस दौरान संजय नेगी ने रावत के घर पहुंचकर उनसे राजनीतिक अवकाश खत्म करने की अपील भी की है।
हरीश रावत ने फेसबुक के जरिए घोषणा की कि वह 15 दिनों के लिए ‘अर्जित अवकाश’ पर जा रहे हैं। जानकारों का मानना है कि यह पार्टी आलाकमान को एक संदेश देने का तरीका है। हालांकि, इस दौरान संजय नेगी ने रावत के घर पहुंचकर उनसे राजनीतिक अवकाश खत्म करने की अपील भी की है।
बीजेपी का वार:
कांग्रेस की इस अंदरूनी लड़ाई पर सत्ताधारी बीजेपी ने भी चुटकी ली है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि कांग्रेस अपनी ही कलह से खत्म हो रही है और 2027 के चुनाव से पहले ही पूरी तरह बिखर जाएगी।
कांग्रेस की इस अंदरूनी लड़ाई पर सत्ताधारी बीजेपी ने भी चुटकी ली है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि कांग्रेस अपनी ही कलह से खत्म हो रही है और 2027 के चुनाव से पहले ही पूरी तरह बिखर जाएगी।
