समाचार विस्तार से:
उत्तराखंड में वर्ष 2011 के बाद पहली बार होने वाली राष्ट्रीय जनगणना इस बार पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस होगी। जनगणना निदेशालय ने राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए माइक्रो-प्लानिंग तैयार की है।
  • 30 हजार ब्लॉक्स में विभाजन: राज्य को गणना के उद्देश्य से 30,000 हिस्सों (Enumeration Blocks) में बांटा गया है। एक ब्लॉक में औसतन 800 नागरिक और 150 से 200 मकान शामिल होंगे।
  • 34 हजार कर्मियों की तैनाती: इस विशाल अभियान के लिए करीब 30 हजार गणना अधिकारी (Enumerators) और 4 हजार सुपरवाइजरों सहित कुल 34 हजार कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है।
  • महत्वपूर्ण तिथियां और चरण:
    • स्व-गणना (Self-Enumeration): नागरिक 10 अप्रैल से 24 अप्रैल 2026 के बीच मोबाइल ऐप के जरिए खुद अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे।
    • मकान सूचीकरण: गणना अधिकारी 25 अप्रैल से 24 मई 2026 के बीच घर-घर जाकर डेटा का भौतिक सत्यापन करेंगे।
    • पहाड़ी क्षेत्रों के लिए विशेष योजना: अत्यधिक बर्फबारी वाले 131 गांवों (जैसे केदारनाथ, बदरीनाथ) में जनसंख्या गणना मुख्य अभियान से पहले ही सितंबर 2026 में पूरी कर ली जाएगी।
  • डिजिटल प्रक्रिया: कर्मी कागज के बजाय मोबाइल ऐप, वेब-मैपिंग और जियो-टैगिंग का उपयोग करेंगे। आंकड़ों की शुद्धता के लिए 30 हजार डिजिटल मानचित्रों का सहारा लिया जाएगा।
  • सख्ती और नियम: जनगणना अधिनियम 1948 के तहत, ड्यूटी में लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों के लिए जेल और गलत जानकारी देने वाले नागरिकों पर जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

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