योगनगरी ऋषिकेश में साहसिक पर्यटन और हवाई कनेक्टिविटी को एक नई दिशा देते हुए 6 अप्रैल 2026 को गंगा नदी के
पशुलोक बैराज (Pashulok Barrage)में सी-प्लेन का सफल ट्रायल किया गया। इस ऐतिहासिक क्षण के साथ ही उत्तराखंड देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो गया है जहाँ जल निकायों पर विमान लैंडिंग की सुविधा उपलब्ध है।
ट्रायल की मुख्य विशेषताएं:
- विमान का प्रकार: यह एक 19-सीटर (19-seater) आधुनिक सी-प्लेन था, जिसका संचालन निजी कंपनी ‘स्काई हॉप’ (Sky Hop) द्वारा किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, विमान ने जौलीग्रांट एयरपोर्ट के रन-वे से शाम 5:53 बजे उड़ान भरी और करीब 6:00 बजे बैराज जलाशय में सफल लैंडिंग की।
- दो बार लैंडिंग और टेक-ऑफ: परीक्षण के दौरान विमान ने जलाशय में दो बार सुरक्षित लैंडिंग और उड़ान भरकर अपनी तकनीकी सक्षमता का प्रदर्शन किया।
- सर्किट योजना: उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा) ने प्रदेश की पांच झीलों—ऋषिकेश बैराज, टिहरी झील, ऊधम सिंह नगर में हरिपुरा जलाशय, नानकमत्ता बैराज और कालागढ़ झील—को जोड़ते हुए एक सी-प्लेन सर्किट (Seaplane Circuit) की योजना बनाई है। इसका उद्देश्य हाई-एंड टूरिज्म को बढ़ावा देना है।
राज्य को मिलने वाले लाभ:
- धार्मिक और साहसिक पर्यटन: सी-प्लेन सेवा शुरू होने से चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं और साहसिक खेलों के शौकीनों को हिमालय की वादियों और गंगा का हवाई नज़ारा देखने को मिलेगा। इससे यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा।
- आपातकालीन उपयोग: पर्यटन के अलावा, आपदा या आपातकालीन स्थितियों में राहत और बचाव कार्यों के लिए यह सेवा मील का पत्थर साबित हो सकती है।
- आर्थिक विकास: विशेषज्ञों का मानना है कि इस सेवा से स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
अधिकारियों के अनुसार, इस सफल ट्रायल के बाद अब इस सेवा को नियमित करने के लिए आवश्यक औपचारिकताओं और सुरक्षा मानकों पर काम किया जाएगा।