देहरादून, 5 मई 2026:
राजधानी देहरादून के दर्शन लाल चौक स्थित 53 साल पुराने अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड के बाहर कल दोपहर एक बेहद भावुक दृश्य देखने को मिला। बैंक में अपनी जीवन भर की पूंजी खो चुके दर्जनों खाताधारक हाथों में भीख का कटोरा लेकर सड़क पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि 10 फरवरी 2026 से बैंक पर लगे आरबीआई के प्रतिबंध के बाद से वे दाने-दाने को मोहताज हो गए हैं।
राजधानी देहरादून के दर्शन लाल चौक स्थित 53 साल पुराने अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड के बाहर कल दोपहर एक बेहद भावुक दृश्य देखने को मिला। बैंक में अपनी जीवन भर की पूंजी खो चुके दर्जनों खाताधारक हाथों में भीख का कटोरा लेकर सड़क पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि 10 फरवरी 2026 से बैंक पर लगे आरबीआई के प्रतिबंध के बाद से वे दाने-दाने को मोहताज हो गए हैं।
घोटाले की जड़ें और वर्तमान स्थिति:
रिपोर्ट्स के अनुसार, बैंक में वर्ष 2013-14 के दौरान लगभग 38 करोड़ रुपये के संदिग्ध ऋण बांटे गए थे, जो अब एनपीए (NPA) में तब्दील हो चुके हैं। इस वित्तीय अनियमितता के खुलासे के बाद भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंक पर 6 महीने के लिए पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है, जिससे 9,000 खाताधारकों के करीब 98 करोड़ रुपये फंस गए हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, बैंक में वर्ष 2013-14 के दौरान लगभग 38 करोड़ रुपये के संदिग्ध ऋण बांटे गए थे, जो अब एनपीए (NPA) में तब्दील हो चुके हैं। इस वित्तीय अनियमितता के खुलासे के बाद भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंक पर 6 महीने के लिए पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है, जिससे 9,000 खाताधारकों के करीब 98 करोड़ रुपये फंस गए हैं।
पीड़ितों का आक्रोश:
कल हुए प्रदर्शन के दौरान, ‘खाताधारक संघर्ष समिति’ के सदस्यों ने घंटाघर तक मार्च किया। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि बैंक खाते सीज होने के कारण वे न तो बच्चों के स्कूल की फीस भर पा रहे हैं और न ही घर का राशन खरीद पा रहे हैं। बुजुर्ग खाताधारकों ने रोते हुए कहा कि उनकी पेंशन और जमा पूंजी इसी बैंक में है और अब उनके पास भीख मांगने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है।
कल हुए प्रदर्शन के दौरान, ‘खाताधारक संघर्ष समिति’ के सदस्यों ने घंटाघर तक मार्च किया। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि बैंक खाते सीज होने के कारण वे न तो बच्चों के स्कूल की फीस भर पा रहे हैं और न ही घर का राशन खरीद पा रहे हैं। बुजुर्ग खाताधारकों ने रोते हुए कहा कि उनकी पेंशन और जमा पूंजी इसी बैंक में है और अब उनके पास भीख मांगने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है।
मुख्य मांगें और प्रशासन का रुख:
- एसआईटी (SIT) जांच: सरकार ने मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की है, लेकिन खाताधारकों का आरोप है कि जांच की गति बहुत धीमी है।
- मुकदमा दर्ज हो: पीड़ितों की मांग है कि घोटाले के लिए जिम्मेदार बैंक प्रबंधन के अधिकारियों पर तुरंत मुकदमा दर्ज कर उनकी संपत्तियां कुर्क की जाएं。
- आरबीआई से गुहार: खाताधारकों ने आरबीआई से मांग की है कि कम से कम घरेलू खर्चों के लिए सीमित निकासी की अनुमति दी जाए。
बैंक के अध्यक्ष मयंक ममगाईं ने इस रोक को अस्थायी बताया है और ग्राहकों से संयम रखने की अपील की है, लेकिन खाताधारकों का विश्वास पूरी तरह से डगमगा चुका है। []